रांची : मॉनसून की पहली बारिश बेहतर, खेतों की करें जुताई

रांची : दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून का 21 जून को झारखंड में प्रवेश हो चुका है. अगले कुछ दिनों में मॉनसून की बारिश पूरे झारखंड में होने की संभावना है. कई जिलों में मॉनसून की बारिश हुई है. इसके मद्देनजर बिरसा कृषि विवि के निदेशक अनुसंधान डॉ डीएन सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि मॉनसून […]

रांची : दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून का 21 जून को झारखंड में प्रवेश हो चुका है. अगले कुछ दिनों में मॉनसून की बारिश पूरे झारखंड में होने की संभावना है.
कई जिलों में मॉनसून की बारिश हुई है. इसके मद्देनजर बिरसा कृषि विवि के निदेशक अनुसंधान डॉ डीएन सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि मॉनसून पूर्व वर्षा के अभाव में जिन खेतों की जुताई नहीं हो पायी हो, उसकी तत्काल जुताई कर दें. ऊपरी एवं मध्यम भूमि में लगायी जानेवाली सीधी बोआई वाली फसलों(धान, मक्का, मडुआ, ज्वार, बाजरा, अरहर, उरद, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली, तिल तथा सब्जी में भिंडी, बैगन व टमाटर, फलदार फसलों में आम, अमरूद, आंवला, नींबू तथा संतरा आदि) को जून के अंत तक या अधिक से अधिक जुलाई के प्रथम सप्ताह तक जरूर पूरी कर लें.
इसके लिए खेतों की मेढ़बंदी करना अति आवश्यक है. इसे जल्दी पूरी कर लें. किसी भी फसल की बोआई के पहले कवकनाशी, कीटनाशी तथा जैविक खाद से बीजों का उपचार जरूर करें. निचली जमीन में जहां 10 जुलाई के आसपास जल जमाव के बाद धान का रोपा करना है, उसके लिए बिचड़ा तैयार करने के लिए खेत के 1/20 वां भाग में धान के बीज की बोआई तीन से पांच दिन के अंतराल पर करें. फसल की बोआई और रोपाई के साथ-साथ पर्याप्त वर्षा होने पर अपने खेतों के आसपास मौजूद छोटे-छोटे गड्ढों और डोभा आदि में वर्षा जल जमा करने का आग्रह किया गया है.

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