सेमिनार के दूसरे दिन भी वेल्डिंग तकनीक पर चर्चा की गयी, दी जानकारी
रांची : अमेरिकी विशेषज्ञ भारत में वेल्डिंग का कार्य कर रहे श्रमिक को स्मार्ट ग्लास की मदद से दिशा निर्देश दे सकते हैं. इसके लिए श्रमिक को एक खास प्रकार का चश्मा पहनना होता है. अमेरिकी विशेषज्ञ श्रमिकों को तकनीकी मदद कर सकते हैं. यह जानकारी एलएंडटी पावर बड़ोदरा के राघवेंद्र शेनॉय ने दी. शुक्रवार को बीएनआर में आयोजित सेमिनार के दूसरे दिन भी वेल्डिंग तकनीक पर चर्चा की गयी. दो दिवसीय सेमिनार पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड व एनटीपीसी के तत्वावधान में शुक्रवार को संपन्न हो गया.
श्री शेनॉय बताया कि आभाषी तकनीक पूरी तरह सूचना प्रौद्योगिकी से संचालित होती है. एनटीपीसी के उप महाप्रबंधक राकेश कुमार ने बताया कि भारतीय ब्वॉयलर रेगुलेशन में कई नयी तकनीक को शामिल नहीं किया गया है. इसलिए विश्व में उपयोग की जा रही वेल्डिंग की विभिन्न आधुनिक तकनीक का उपयोग मुमकिन नहीं हो पा रहा है. सेमिनार के माध्यम से केंद्र सरकार को ब्वॉयलर रेगुलेशन में नयी वेल्डिंग तकनीक को शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा जायेगा.
आइआइडब्ल्यू के रतन पोद्दार ने कहा कि भारत में वेल्डिंग की कई आधुनिक तकनीक आ गयी है. जिससे कार्यक्षमता में वृद्धि होगी. इनका उपयोग करके पतरातू सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर स्टेशन का समय से पहले काम पूरा किया जा रहा सकता है. इस प्रकार 12 हजार करोड़ के निवेश में बड़ा लाभ प्राप्त किया जा सकेगा.
सेमिनार में बिना तोड़े टेस्टिंग की तकनीक के बारे में चर्चा की गयी. पतरातू में इस तकनीक का उपयोग करने पर जोर दिया गया. पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड(पीवीयूएनएल) के सीइओ सुदर्शन चक्रवर्ती ने बताया कि मार्च 2018 में पतरातू पावर प्लांट का काम शुरू हुआ है.
पहले चरण में 800 मेगावाट की पहली यूनिट से बिजली उत्पादन मार्च 2022 से किया जायेगा. इसके छह माह के अंतराल में दूसरी 800 मेगावाट की यूनिट चालू होगी. तीसरी यूनिट पहली के चालू होने के एक साल बाद उत्पादन कर पायेगी.
