रांची : दो दिन से नहीं मिल रहा लिंक, परेशान हैं ग्राहक

सरकारी बस स्टैंड से रोजाना कोडरमा, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद व चाईबासा समेत अन्य शहरों के लिए 70 बसें रवाना होती हैं, जिससे 3500 से ज्यादा यात्री सफर करते हैं. यह बस स्टैंड किसी हॉरर फिल्म के सेट जैसा जान पड़ता है. इसका मुख्य भवन पुराना और जर्जर हो चुका है. भवन में जगह-जगह दरारें पड़ […]

सरकारी बस स्टैंड से रोजाना कोडरमा, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद व चाईबासा समेत अन्य शहरों के लिए 70 बसें रवाना होती हैं, जिससे 3500 से ज्यादा यात्री सफर करते हैं. यह बस स्टैंड किसी हॉरर फिल्म के सेट जैसा जान पड़ता है. इसका मुख्य भवन पुराना और जर्जर हो चुका है. भवन में जगह-जगह दरारें पड़ चुकी हैं. ऊपर का छज्जा भी जर्जर है. बरसात में भवन का प्लास्टर झड़ता है और छज्जा से टुकड़े टूट कर नीचे गिरते हैं, जिससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है.
बस पार्किंग में सफाई की बात तो छोड़ ही दीजिये, मुख्य भवन के अंदर स्थित टिकट काउंटर तक में सफाई की व्यवस्था नहीं है. यहां यात्रियों के लिए बनी सीमेंट की बेंच के आसपास हमेशा बदबू उठती रहती है. यहां सुविधा के नाम पर न तो प्रतीक्षालय है और न ही पानी की व्यवस्था. महिला और बुजुर्ग यात्रियों के पास भी टिकट लेकर बाहर आना तथा खुले में खड़े रहना मजबूरी है. गर्मी के दिनों में बैठने की बेहतर व्यवस्था न रहने से यात्रियों को भारी परेशानी होती है. बस स्टैंड का परिसर में जगह-जगह कचरे का अंबार फैला रहता है.
इस बस स्टैंड में एक भी नियमित कर्मचारी नहीं है. यहां मौजूद बस स्टैंड के सेवानिवृत्त ट्रैफिक क्लर्क केपी राय ने बताया कि बस स्टैंड का अपना कोई सफाई कर्मी नहीं है. नगर निगम के सफाई कर्मी के भरोसे यहां काम चलता है. शौचालय सिर्फ एक है, जो यात्रियों की बड़ी संख्या के कारण पर्याप्त नहीं है. शौचालय के अभाव में लोग परिसर के कोने में जाकर हल्का होते हैं.
कांटाटोली बस स्टैंड : साफ सफाई की व्यवस्था और बेहतर बनानी होगी
हर के बीचोबीच कांटाटोली स्थित है खादगढ़ा बस स्टैंड सौंदर्यीकरण के बाद इस बस स्टैंड का नाम भगवान बिरसा मुंडा बस टर्मिनल कर दिया गया है.
रोजाना सुबह 5:00 बजे से रात के 9:30 बजे तक यहां से करीब 200 एसी बसों और करीब 150 छोटी-बड़ी नॉन एसी बसों का परिचालन होता है. बस स्टैंड पर 26 वर्षों से उद्घोषक का काम कर रहे अब्दुल पारिख की मानें तो 12 हजार से ज्यादा यात्री प्रतिदिन यहां से यात्रा करते हैं. सौंदर्यीकरण के बाद लोगों को नया बस स्टैंड तो मिल गया, लेकिन यहां की व्यवस्था अब तक नहीं सुधरी है.
स्थानीय दुकानदार और यात्रियों की मानें, तो यहां सफाई होती है, लेकिन केवल खानापूर्ति होती है. वहीं, स्टैंड पर बसों की कतार देख कर लगता है कि यहां बस स्टैंड की क्षमता से अधिक बसों का आना-जाना होता है. इससे बस स्टैंड के हर कोने में, यहां तक की सड़कों पर भी बसें खड़ी रहती हैं. अब भी यहां के कई हिस्से में कच्ची जमीन है, जिस पर बसें चलने से धूल उड़ती रहती है. बस स्टैंड पर बिरसा मुंडा फूड प्लाजा के सुपरवाइजर हरिनाथ मुंडा ने कहा कि यहां दो सामूहिक शयन कक्ष हैं.
एक 12 बेड वाला पुरुष यात्रियों का तथा दूसरा पांच बेड वाला महिला यात्रियों का शयनकक्ष, लेकिन यहां कोई महिला स्टाफ नहीं है. पीने के पानी की व्यवस्था तो है, पर सिर्फ एक जगह ही. वहां भी कभी-कभी पानी नहीं रहता. कुल मिला कर कांटाटोली बस स्टैंड में आधारभूत संरचना तो अच्छी है, पर यहां की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है. सफाई में यात्रियों को भी सहयोग करना होगा.
आइटीआइ बस स्टैंड : स्टैंड के नाम पर मैदान और बसों की कतार दिखती है
इटीआइ बस स्टैंड से रोजाना करीब 1000 बसें छत्तीसगढ़ के रायपुर, अंबिकापुर, जसपुर के अलावा सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, विरमित्रापुर, चंदवा, लातेहार, गढ़वा, डालटनगंज, बालूमाथ, चतरा सहित अन्य इलाकों के लिए चलती हैं.
इस स्टैंड को को स्थापित हुए छह-सात साल हो गये हैं, लेकिन अब तक यहां यात्री सुविधाओं का टोटा है. हालत यह है कि यहां ढंग का यात्री शेड तक नहीं है. पांच साल पहले बने यात्री शेड की स्थिति खराब है. यहां शौचालय, पानी की व्यवस्था, रोशनी का प्रबंध, वाहनों पार्किंग, यात्री शेड और दुकानों आदि का निर्माण कराना था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. लोग खुले में ही हल्का होते हैं.
क्योंकि यहां का शौचालय काफी गंदा रहता है. सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है. रात होते ही पूरे परिसर में अंधेरा छा जाता है. सुरक्षा की व्यवस्था नहीं होने के कारण रात में स्थिति खराब हो जाती है. बसों को खड़ा करने के लिए अच्छी व्यवस्था नहीं है. बारिश में स्थिति नारकीय हो जाती है. यहां बड़े-बड़े गड्ढे बन गये हैं, जिसमें पानी जमा रह रहा है.
पूरे स्टैंड परिसर में दुर्गंध फैला हुआ है, क्यों कि जगह-जगह कचरे का अंबार फैला हुआ है. बस स्टैंड की बेतरतीब व्यवस्था और गंदगी से आसपास मुहल्ले को लोग भी परेशान हैं. वहीं सड़क जाम होने से भी लोगों का गुजरना मुश्किल हो गया है. झोपड़ीनुमा होटल व दुकान हैं, जिनकी स्थिति बिल्कुल अच्छी नहीं है. मजबूरी में यात्री इन्हीं होटलों में खाते-पीते हैं.

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