रांची : घरों की चहारदीवारी और मजदूरी करने तक सीमित रहनेवाली झारखंड की 15 लाख महिलाएं आज स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर बदलाव की कहानियां गढ़ रहीं हैं. लिहाजा सरकार की पहल पर राज्य की वित्तीय एजेंसियां इनका वित्तपोषण का दायरा बढ़ाना चाहती हैं. इन्हें पशु सखी, कृषक मित्र, मत्स्य पालन और पशुपालन के अन्य साधनों से जोड़ कर आत्मनिर्भर बनाने की योजना है.
मुख्यमंत्री की सलाह के बाद आरबीआइ ने बैंकों को निर्देश दिये हैं कि वह समूह की महिलाओं को फिशरिज और एनिमल हसबैंडरी के लिए विशेष तौर पर आर्थिक मदद करें. अकेले दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत केवल झारखंड में 15,733 गांवों में करीब 1,32,531 सखी मंडलों का गठन कर उन्हें आजीविका के ऐसे साधनों से जोड़ा गया है. जो महिलाएं कल तक जंगल से लकड़ी चुन कर और मजदूरी करके गुजारा करती थीं आज वो सफल उद्यमी बन गयी हैं.
छोटी बचत को प्रोत्साहित कर रहीं सखी मंडल से जुड़ी महिलाएं : ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रोत्साहित करना है. झारखंड में 15 लाख से ज्यादा परिवारों की आजीविका को सशक्त किया गया है. झारखंड के सुदूर गांवों की महिलाएं स्वयं सहायता समूह में बचत करने तक ही सीमित नहीं हैं.
स्किल्ड होकर अब ये लीक से हट कर कई तरह के काम कर रही हैं. राज्य के 24 जिलों के 217 ब्लॉक में लाखों गरीब परिवारों को सखी मंडल से जोड़ा गया है. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के अनुसार एसबी खाते में 1334.88 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जमा है.
