रांची : राज्य सरकार ने ए क मामले में हाइकोर्ट की एकल पीठ के फैसले को चुनाैती देने के लिए बड़ी संख्या में अपील याचिकाएं दायर करने का निर्णय लिया है. सरकार के विधि विभाग के निर्णय के आलोक में स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग द्वारा अपील याचिका दायर करना भी शुरू कर दिया गया है. लगभग 226 याचिकाएं दायर की जायेंगी.
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों की सेवा मान्यता को लेकर दिये गये एकल पीठ के फैसले के खिलाफ उक्त अपील याचिकाएं दायर की जा रही हैं. इसमें एकल पीठ के आदेश को गलत बताते हुए निरस्त करने का आग्रह किया जा रहा है.
एकल पीठ ने 226 रिट याचिकाअों पर सुनवाई के बाद पांच सितंबर 2018 को आदेश पारित किया था. कहा गया था कि प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय में जो भी शिक्षक व कर्मचारी कार्यरत हैं, उनकी सेवा नियमित की जाये. कार्यरत शिक्षाकर्मियों के काम करने की अवधि के बकाया वेतन का भुगतान किया जाये.
साथ ही जो शिक्षक अप्रशिक्षित हैं, सरकार उन्हें प्रशिक्षण में भेजे. आदेश का अनुपालन दो माह के अंदर करने का निर्देश दिया था. विद्यालयों में कार्यरत व सेवानिवृत्त लगभग 1000 हजार से अधिक शिक्षक व कर्मचारियों ने रिट याचिका दायर की थी.
आदेश का अनुपालन कराने के लिए अवमानना याचिका भी दायर : एकल पीठ के आदेश का अनुपालन कराने के लिए अवमानना याचिका भी दायर की गयी है. याचिकाकर्ता अब्दुल कुदुस, अरशद इमाम व अन्य की अोर से अलग-अलग अवमानना याचिका दायर कर पांच सितंबर 2018 के आदेश का अनुपालन कराने का आग्रह किया गया है.
प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालयों में 30-35 वर्षों से शिक्षक व कर्मचारी बिना वेतन के ही काम कर रहे है. पटना हाइकोर्ट के फैसले के बाद वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों व कर्मचारियों की सेवा मान्यता व वेतन देने का आदेश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में झारखंड सरकार ने आलम समिति का गठन किया. उसकी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने दर्जनों शिक्षकों व कर्मचारियों की सेवा मान्यता दी गयी, लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षाकर्मियों की सेवा मान्यता नहीं दी गयी. शिक्षाकर्मियों ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर सेवा की मान्यता देने व बकाया वेतन भुगतान करने की मांग की थी.
