रांची : खाद्य आपूर्ति मंत्री तथा स्वर्णरेखा प्रदूषण नियंत्रण अभियान के संयोजक सरयू राय गुरुवार को मुरी का दौरा करेंगे. श्री राय हिंडाल्को के ध्वस्त कास्टिक तालाब (रेड मड पौंड) से कृषि, पर्यावरण एवं र्स्वणरेखा नदी की पारिस्थितिकी को हुए नुकसान का जायजा लेंगे.
उन्होंने कहा है कि हिंडाल्को द्वारा किये जा रहे रेड मड उठाव तथा केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विगत एक दशक में हिंडाल्को को दिये गये निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा भी की जायेगी.
उन्होंने गूगल मैप से रेड मड पौंड का तटबंध टूटने के पूर्व और बाद की ली गयी तस्वीरों को डाउनलोड कर इसके आधार पर कहा है कि करीब 7.50 हेक्टेयर (19 एकड़) क्षेत्रफल में वहां की कृषि योग्य भूमि को नुकसान पहुंचा है.
इस नुकसान की भरपाई के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर भुक्तभोगियों को मुआवजा दिये जाने की आवश्यकता है. भूमि की सतह पर हुए नुकसान के अतिरिक्त कास्टिक तालाब से लंबे समय तक हुए रिसाव के कारण उस क्षेत्र के कुओं एवं भूगर्भ जल के प्रदूषण का आकलन भी जरूरी है. वहीं स्वर्णरेखा नदी के जल तथा मछलियों एवं अन्य जल जीवों को हुए नुकसान का आकलन भी किया जाना चाहिए.
श्री राय के अनुसार यह मानव निर्मित घटना लगती है तथा यह पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के स्थापित वैधानिक मानकों की अवहेलना के कारण हुई है.
इसके संबंध में दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए तथा लापरवाही बरतने वाले चाहे सरकार में हों अथवा औद्योगिक संस्थान में, की शिनाख्त कर उन पर कार्रवाई होनी चाहिए. राज्य सरकार द्वारा इसकी जांच के लिए गठित समिति के संबंध में उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को कतिपय सुझाव दिया है, जिस पर अमल करने का लिखित आश्वासन मुख्य सचिव ने दिया है.
मलबा का रिसाव रोकने के लिए बन रही है नाली
मुरी़ : हिंडाल्को हादसे के बाद सात दिन में करीब 25 हजार टन रेड मड की ढुलाई हो चुकी है. हालांकि इस संबंध में कंपनी ने सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया है. काम में लगे लोगों ने बताया कि सड़क को भी मजबूत करने का काम किया जा रहा है. इसके बाद हाइवा की संख्या बढ़ायी जायेगी.
बारिश होने की स्थिति में मलबा नदी में न जाये, इसके लिए मलबा के किनारे नाली का निर्माण शुरू किया गया है. नाली में गिरने वाले पानी को पंप के सहारे लिफ्ट कर वाटर पिट में भेजा जायेगा. वहीं वायु प्रदूषण रोकने व बारिश में मलबा भींगने से बचाने के लिए उसे प्लास्टिक से ढंकने की कोशिश हो रही है.
बिजली पहुंचाने के काम में बाधा
मारदु गांव में 11 हजार लाइन का तार खींचने के काम में बुधवार को बाधा आ गयी. स्थानीय लोगों ने कुछ मांगों को लेकर दोपहर करीब तीन बजे काम पर रोक लगा दी. मामला सुलझाने के लिए स्थानीय लोग व प्रबंधन के लोग लगे हुए थे. समाचार लिखे जाने तक बातचीत जारी थी.
पानी की जांच के लिए सैंपल भेजे गये
हिंडाल्को हादसे के बाद प्रभावित गांवों में जल प्रदूषण की जांच के लिए कुएं, तालाब व चापाकलों समेत सभी वाटर बॉडी के चार सौ से ज्यादा सैंपल जांच के लिए भेजे गये. इसमें स्वर्णरेखा नदी का भी सैंपल शामिल है. सरकारी आदेश के बाद कंपनी ने सैंपल को जांच के लिए भिजवाया है. इसकी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी जायेगी.
