समाज कल्याण विभाग ने लिया है आंगनबाड़ी केंद्र को ही राशि उपलब्ध कराने का निर्णय
रांची : राज्य भर के आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्षीय बच्चों को सप्ताह में तीन दिन (सोमवार, बुधवार व शुक्रवार) अंडा दिया जाता है. पूरक पोषाहार व प्रोटीन के बेहतर स्रोत के रूप में हर एक बच्चे को मुर्गी का एक उबाला हुआ अंडा मिलता है. अंडा आपूर्ति का काम, समाज कल्याण निदेशालय की अोर से निकाले गये टेंडर के बाद सालेम, तमिलनाडु के फर्म किसान पॉल्ट्री को मिला था.
निविदा की शर्त के मुताबिक कंपनी का कार्यादेश 30 अप्रैल 2019 को खत्म हो रहा है. सूत्रों के मुताबिक आचार संहिता व अन्य कारणों से फिर से अंडा वितरण संबंधी निविदा नहीं निकल सकती. ऐसे में समाज कल्याण विभाग ने यह निर्णय लिया है कि एक मई से अंडा खरीदने के लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को ही राशि उपलब्ध करायी जायेगी. इस मुद्दे पर वित्त विभाग की सहमति ले ली गयी है. यानी अब किसी एक कंपनी के बजाय सभी आंगनबाड़ी केंद्र के स्तर से ही वहां के बच्चों के लिए अंडे की खरीद होगी.
पूरक पोषाहार कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को अभी दी जा रही खिचड़ी व अन्य खाद्य का क्रय सेविका व सहायिका के स्तर से ही होता है. इससे पहले गैर सरकारी संस्था भोजन का अधिकार ने भी मुख्यमंत्री को यह सुझाव दिया गया था कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन की तर्ज पर आंगनबाड़ी केंद्रों को ही अंडे खरीदने के पैसे दिये जायें. इससे स्थानीय रोजगार भी पैदा होगा.
गौरतलब है कि किसान पॉल्ट्री द्वारा अंडा आपूर्ति किये जाने के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को अंडा समय पर नहीं मिलने, गैप के बाद मिलने तथा खराब होने पर इन्हें बदलने में विलंब की शिकायतें मिलती रही हैं.
हर माह सात करोड़ रुपये के अंडे की होती है आपूर्ति
किसान पॉल्ट्री राज्य भर के 38432 आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब 10.20 लाख बच्चों को सप्ताह में तीन दिन दिये जाने वाले अंडे की आपूर्ति करती है. सरकार एक अंडे के लिए अभी 5.93 रुपये का भुगतान कर रही है. हर माह औसतन 1.22 करोड़ अंडे की आपूर्ति होती है, जिसकी कीमत लगभग 7.23 करोड़ रुपये है.
