रांची : राजधानी रांची के व्यवसायी इन दिनों त्योहारों के चंदे की रसीद से परेशान हैं. विभिन्न संगठनों के नाम पर लोग व्यवसायी के पास चंदे की रसीद लेकर आते हैं और रसीद में मनचाहा रकम भर कर व्यवसायी या उनके कर्मी के हाथ में थमा कर चले जाते हैं.
व्यवसायी चंदे में रकम कम करने के लिए अनुरोध करते रह जाते हैं, लेकिन चंदा की रसीद देनेवालों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है. यही नहीं, चंदे की रसीद काटने वाले कहते हैं, ‘यह चंदा नहीं, पूजा के लिए सहयोग राशि है, तैयार रखें.’ इधर, कार चालक और दूसरे मालवाहक वाहन चलाने वाले भी चंदा वसूलने वालों से परेशान हैं. बीच सड़क पर चंदा वसूलने वाले लाठी-डंडा लेकर खड़े हो जाते हैं.
वाहन चालक से जबरन 10 से 20 रुपये या इससे अधिक का चंदा वसूलते हैं. इसके बाद ही वाहन चालक को आगे बढ़ने की अनुमति देते हैं. चंदा मांगने का सिलसिला राजधानी की सड़कों पर ही नहीं, बल्कि, गली-मुहल्लों के बाइलेन सड़कों में भी यही स्थिति रहती है. ग्रामीण इलाके में यह काम काफी होता है.
