मनोज लाल
मार्च 2019 तक हर सांसद को तीन-तीन ग्राम पंचायतों को आदर्श ग्राम बनाना था
रांची : राज्य में सांसद आदर्श ग्राम योजना अधूरी रह गयी. पांच साल में तीन फेज के तहत हर सांसदों को तीन-तीन गांवों का विकास करना था, लेकिन फेज तीन के ग्राम पंचायतों पर कुछ काम नहीं हो सका. 14 में से आठ सांसद तो (लोकसभा सदस्य) फेज तीन के लिए गांवों का चयन तक नहीं कर सके. उन्होंने ग्राम पंचायतों की सूची तक नहीं भेजी. ऐसे में वहां विकास के कुछ काम नहीं हो सके और चुनाव भी आ गया. कुल मिला कर फेज तीन के ग्राम पंचायतों में कुछ काम ही नहीं हो सका.
सारे सांसदों को मार्च 2019 तक तीन-तीन ग्राम पंचायतों का चयन करना था, ताकि वहां सर्वांगीण विकास के कार्य हो सके. सांसदों द्वारा दो चरणों के लिए ग्राम पंचायतों का चयन तो हुआ और वहां विकास के कार्य भी कराये गये, लेकिन तीसरे चरण के लिए चयन फंस गया. छह सांसदों ने तो जनवरी के पहले ही ग्राम पंचायत का चयन कर उपायुक्तों व ग्रामीण विकास विभाग को भेज दिया था. यहां तो कुछ विकास के कार्य हुए हैं, लेकिन शेष आठ सांसदों की अनुशंसा मिली ही नहीं. ऐसे में विभाग सूची भी फाइनल नहीं कर सका.
कई बार लिखा गया पत्र : फेज तीन के लिए ग्राम पंचायत चयन को लेकर ग्रामीण विकास विभाग ने सांसदों को कई बार पत्र लिखा. उनसे आग्रह किया कि वे जल्द से जल्द चयन करके सूची संबंधित उपायुक्त व विभाग को उपलब्ध करा दें, ताकि वहां विकास के कार्य हो सके. विभाग दो जून 2017 के बाद से अब तक पांच बार सांसदों को पत्र लिख चुका है.
प्रधानमंत्री ने शुरू करायी थी यह योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्तूबर 2014 को ही सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत करायी थी. योजना के तहत हर सांसद को पांच साल में यानी 2019 तक तीन-तीन गांव लेकर उसे आदर्श ग्राम बनाना था.
गांवों को गोद लेकर उसमें विकास के कार्य कराये जाने थे. इसके तहत गांवों में बुनियादी सुविधाअों के साथ ही खेती, पशुपालन, कुटीर उद्योग, रोजगार उपलब्ध कराने आदि के कार्य करने थे. लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना था. पीएमजीएसवाइ, आवास योजना, मनरेगा से भी योजनाएं लेनी थी. इसमें ग्राम पंचायत व कंपनियों के सीएसआर के पैसे भी लगाने थे.
