रांची : लोकेश ने कहा था गोली मारो, इसके बाद एमके सिंह ने मुझसे राइफल लेकर व्यवसायी बंधुओं को मारी थी गोली

लोकेश चौधरी के अंगरक्षक धर्मेंद्र तिवारी ने रिमांड में पुलिस को दी जानकारी रांची : रांची पुलिस की लगातार छापेमारी के दबाव में आकर डबल मर्डर मामले में सरेंडर करनेवाले लोकेश चौधरी के अंगरक्षक धर्मेंद्र तिवारी को अरगोड़ा पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है. इसके साथ ही जेल भेजे गये लोकेश के […]

लोकेश चौधरी के अंगरक्षक धर्मेंद्र तिवारी ने रिमांड में पुलिस को दी जानकारी
रांची : रांची पुलिस की लगातार छापेमारी के दबाव में आकर डबल मर्डर मामले में सरेंडर करनेवाले लोकेश चौधरी के अंगरक्षक धर्मेंद्र तिवारी को अरगोड़ा पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है. इसके साथ ही जेल भेजे गये लोकेश के एक और अंगरक्षक सुनील कुमार सिंह को भी रिमांड पर लिया है. दोनों को पांच दिनों के लिए रिमांड पर लिया गया है. दूसरी तरफ, लोकेश चौधरी व एमके सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से कुर्की जब्ती और इश्तेहार का वारंट हािसल कर लिया है़
पूछताछ में धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि रुपये को लेकर जब दोनों व्यवसायियों का विवाद एमके सिंह और लोकेश से होने लगा, तो लोकेश ने एमके सिंह से कहा कि मारो, गोली मार दो. इसके बाद एमके सिंह ने मेरे हाथ से राइफल लेकर दोनों व्यवसायी महेंद्र अग्रवाल और हेमंत अग्रवाल को गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गयी.
इसके बाद कमरे में ताला बंद कर सभी भाग निकले. धर्मेंद्र तिवारी ने हत्याकांड में प्रयुक्त राइफल भोजपुर स्थित अपने गांव में होने की जानकारी दी है. जिसके बाद पुलिस की एक टीम हथियार बरामद करने के लिए बिहार रवाना हो गयी है. धर्मेंद्र ने पुलिस को यह भी आश्वासन दिया है कि वह हत्याकांड के बाद भागने में प्रयुक्त गाड़ी को बरामद करवा सकता है. हालांकि, धर्मेंद्र तिवारी द्वारा दी गयी जानकारी के बारे में पुलिस सत्यापन कर रही है. इसलिए पुलिस ने यह खुलासा नहीं किया है कि धर्मेंद्र ने पुलिस को क्या जानकारी दी है.
बताया जाता है कि धर्मेंद्र की बातों का सत्यापन करने के लिए उसे और सुनील सिंह को आमने-सामने बैठा कर और अलग-अलग भी पूछताछ की गयी. पूछताछ में दोनों के बयान में कई कुछ बातों में भिन्नता भी पायी है. इसलिए पुलिस का मानना है कि लोकेश और एमके सिंह की गिरफ्तारी के बाद ही हत्याकांड की पूरी स्थिति स्पष्ट हो पायेगी.
उल्लेखनीय है कि पुलिस की जांच में हत्याकांड में धर्मेंद्र तिवारी की संलिप्तता की बात सामने आ चुकी है. क्योंकि एक बात पूर्व में स्पष्ट हो चुकी है कि हत्या में जिस राइफल का प्रयोग हुआ था, वह धर्मेंद्र तिवारी के पास था.
वहीं, सुनील सिंह ने पुलिस को बताया कि घटना से पहले वह लोकेश चौधरी के साथ उसके ऑफिस आया था. गाड़ी लोकेश चौधरी का ड्राइवर शंकर चला रहा था. इसके बाद लोकेश चौधरी ने शंकर से कहा कि एमके सिंह और धर्मेंद्र तिवारी हीनू चौक के पास हैं.
इसी बीच दोनों व्यवसायी भाई भी लोकेश चौधरी के ऑफिस मोटी रकम लेकर पहुंच चुके थे. खुद को फर्जी आइबी ऑफिसर बताने वाले एमके सिंह ने धर्मेंद्र तिवारी के साथ लोकेश के अॉफिस में रेड किया. लोकेश की टेबल के पास रुपये लेकर बैठे दोनों व्यवसायी भाइयों को एमके सिंह ने खुद को आइबी का अधिकारी बताते हुए रुपये उठा लिये थे. क्योंकि फर्जी रेड कर रुपये हड़पने की योजना पहले से तैयार कर ली गयी थी. योजना के अनुसार ही दोनों व्यवसायी भाइयों के ऑफिस पहुंचने के बाद लोकेश ने एमके सिंह को फोन कर बुलाया था. जब एमके सिंह ने रुपये उठा लिया था, तब व्यवसायी भाइयों ने लोकेश से कहा था कि क्या भइया रुपये लेकर ऑफिस बुलाने के बाद फंसा दिये न. रुपये वापस दिला दीजिए. इस पर लोकेश ने दोनों व्यवसायियों को आश्वासन दिया कि वह मामले में कुछ करता है.
फर्जी रेड में जब्त रुपये को छोड़ने के लिए अधिक हिस्सा की मांग करने लगे. लेकिन दोनों भाई ऐसा करने को तैयार नहीं थे. तब दोनों भाइयों को डराने के लिए एमके सिंह ने पहली फायरिंग पिस्टल से की. इसके बाद भी जब दोनों भाई रुपये छोड़ने को तैयार नहीं हुए, तब दोनों पक्ष के बीच विवाद हो गया और दोनों की हत्या कर दी गयी.

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