सारंडा में लौह अयस्क के खनन पर केंद्र की सहमति

शकील अख्तर, रांची : सारंडा में लौह अयस्क के खनन का मामला सुलझ गया है. दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद केंद्र सरकार ने जोन-1 और जोन-2 के अंतर को समाप्त कर दिया है. साथ ही एक ही साथ दोनों ही क्षेत्रों में खनन करने पर सहमति दे दी है. इससे राज्य के […]

By Prabhat Khabar Print Desk | March 23, 2019 2:40 AM

शकील अख्तर, रांची : सारंडा में लौह अयस्क के खनन का मामला सुलझ गया है. दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद केंद्र सरकार ने जोन-1 और जोन-2 के अंतर को समाप्त कर दिया है. साथ ही एक ही साथ दोनों ही क्षेत्रों में खनन करने पर सहमति दे दी है. इससे राज्य के उद्योगों पर गहराया संकट टल गया है.

इंडियन काउंसिल ऑफ फारेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (आइसीएफआरइ) की रिपोर्ट के आधार पर वन मंत्रालय ने सारंडा में लौह अयस्क के खनन पर पाबंदी लगी दी थी.
एलीफैंट कॉरिडोर में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित : वन मंत्रालय ने सारंडा को तीन जोन में बांटा था. इसके तहत एलीफैंट कॉरिडोर में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित था. जोन-वन का लौह अयस्क रिजर्व खत्म होने के बाद जोन-टू में खनन की अनुमति थी.
केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा लगायी गयी इस पाबंदी की वजह से राज्य सरकार को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था. साथ ही राज्य में इस्पात उद्योगों के लिए निर्धारित उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप आवश्यक मात्रा में लौह अयस्क उपलब्ध कराना संभव नहीं था.
इसके मद्देनजर सरकार ने केंद्र से अपनी परेशानियों का उल्लेख किया. समस्या के समाधान के लिए हुई दूसरी उच्चस्तरीय बैठक में विकास आयुक्त डॉ डीके तिवारी ने राज्य का पक्ष रखा.
इसके बाद केंद्र सरकार ने जोन-वन और जोन-टू में एक ही साथ खनन कार्य करने पर सहमति दे दी. उल्लेखनीय है कि उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक में राज्य की ओर से कोई अधिकारी शामिल नहीं हुआ.
आइसीएफआरइ की रिपोर्ट और राज्य पर उसका प्रभाव
सारंडा पर शाह कमीशन की रिपोर्ट के बाद केंद्रीय वन मंत्रालय ने आइसीएफआरइ को अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट पेश करने की जिम्मेदारी सौंपी थी. काउंसिल ने अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट केंद्रीय वन मंत्रालय को सौंपी.
रिपोर्ट में सारंडा को तीन क्षेत्र में बांटा गया. एक क्षेत्र को एलीफैंट कॉरिडोर घोषित करते हुए उस क्षेत्र में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया. बाकी को दो माइनिंग जोन में बांट दिया. इसके साथ ही यह शर्त लगा दी कि जोन-एक में माइनिंग समाप्त होने के बाद ही जोन-टू में माइनिंग शुरू की जा सकेगी.
साथ ही सारंडा में खनन से जुड़ी आधारभूत संरचना का निर्माण करने के बाद राज्य को सालाना अधिकतम 100 मिलियन टन लौह अयस्क के खनन की ही अनुमति मिल सकेगी. हालांकि राज्य के स्टील उद्योंगों की क्षमता बढ़ाने और नये स्टील प्लांटों के सहारे निर्धारित उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने के लिए सालाना 131 मिलियन टन लौह अयस्क की जरूरत है. काउंसिल की रिपोर्ट के आधार पर लगायी गयी पाबंदी की वजह से राज्य को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था.

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