रांची : आइसीएआर, नयी दिल्ली के सहायक महानिदेशक (तेलहन व दलहन) डॉ पीके चक्रवर्ती ने कहा है कि देश करीब 80 हजार करोड़ का खाद्य तेल आयात करता है.
देश में उत्पादित तेलहनी फसलों से 40 प्रतिशत खाद्य तेल की ही जरूरत पूरी होती है. 60 प्रतिशत खाद्य तेल आयात करना पड़ता है. देश के कुल खाद्य तेल की आवश्यकता में सोयाबीन तेल का 26 प्रतिशत योगदान है. कृषि के हरेक क्षेत्र में क्रांति हुई है.
खाद्य तेल की बढ़ती मांग को देखते हुए देश में तेलहनी फसल की क्रांति की जरूरत है. डॉ चक्रवर्ती बिरसा कृषि विवि में शनिवार से शुरू हुई सोयाबीन फसल की 49वीं राष्ट्रीय समूह बैठक के दघाटन मौके पर बोल रहे थे.
बैठक में देश भर से वैज्ञानिक जुटे हैं. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विवि के कुलपति डॉ परविंदर कौशल ने कहा कि झारखंड का मौसम व भूमि सोयाबीन फसल की खेती के लिए काफी उपयुक्त है. राज्य की सिर्फ 11.5 हजार हेक्टेयर भूमि में सोयाबीन की खेती से आठ हजार टन उत्पादन होता है.
राज्य में सोयाबीन फसल की बाजार व्यवस्था एवं प्रसंस्करण सुविधा के अभाव में किसानों में कम रुचि देखी जा रही है. आइसीएआर की भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर के निदेशक डॉ वीएस भाटिया ने कहा कि वैश्विक रूप से लगभग 122 मिलियन हेक्टेयर भूमि में सोयाबीन की खेती होती है. इसका उत्पादन 336 मिलियन टन और उत्पादकता 2753 किलो प्रति हेक्टेयर है.
आगंतुकों का स्वागत विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ डीएन सिंह ने किया. संचालन शशि सिंह तथा धन्यवाद डॉ जेडए हैदर ने दिया. मौके पर डॉ एमएस यादव, डॉ एमपी सिन्हा, प्रो डीके रूसिया, डॉ आरएस कूरिल, डॉ सोहन राम, डॉ एएन शर्मा व डॉ एसके गुप्ता मौजूद थे.
आइएएस अफसरों के लिए रोल मॉडल थीं लक्ष्मी सिंह
डॉ अशोक कुमार सिंह
पूर्व मुख्य सचिव लक्ष्मी सिंह के निधन से समाज को बड़ी क्षति हुई है. वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों के लिए आदर्श थीं. सारे अफसर उन्हें रोल मॉडल मानते थे. वह अपने सेवाकाल में कभी किसी ओर नहीं झुकी.
हमेशा वही करती रहीं, जो सही था. न ही किसी दबाव में आयीं. वह जिस भी पद पर रहीं, उस पद का गौरव बढ़ाती रहीं. हमेशा जन कल्याण से जुड़े कार्यों पर ज्यादा ध्यान देती रहीं. वह ईमानदार, कर्मठ व कर्तव्यनिष्ठ पदाधिकारी थीं. आइएएस संवर्ग के अफसरों में बिल्कुल स्वच्छ छवि की अफसर रही हैं. उनके साथ मुझे काम करने का मौका मिला, यह बड़ी बात है. उनसे सीखने का भी अवसर मिला.
जब भी महत्वपूर्ण मामले होते थे, तो हमें उनका सहयोग मिलता था. वह अक्सर कहती थीं कि किसी पक्ष में काम करने के बजाय जनता के कल्याण का काम करें. किसी के दबाव में काम नहीं करने की सीख भी अफसरों को उनसे ही मिली है. पूरे सेवाकाल में उन पर कभी भी काम को लेकर किसी तरह की उंगली नहीं उठी.
-लेखक राज्य के पूर्व मुख्य सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता हैं
