रांची: द कन्वेंशन ऑन द एलिमिनेशन ऑफ ऑल फॉम्स ऑफ वायलेंस अगेंस्ट वुमन का 58 वां सत्र जेनेवा स्थित मानवाधिकार मुख्यालय में शुरू हुआ. इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न महिला संगठनों के 26 प्रतिनिधि शामिल हुए़.
झारखंड से महिला आयोग की पूर्व सदस्य वासवी किड़ो भी शामिल हुईं. उन्होंने वनाधिकार कानून लागू करने, औरतों को पट्टा देने और उनका अलग आंकड़ा तैयार करने, लघु वनोपजों पर औरतों का प्रबंधन व नियंत्रण कायम करने, लघुवनोपजों पर आधारित उद्यम स्थापित करने, वन भूमि पर अकेली औरत को पट्टा देने, खाद्य सुरक्षा का अधिकार, कानून के तहत आदिवासियों की फिर से बेदखली रोकने और आदिवासी महिलाओं और बच्चों में रक्त की अल्पता, कुपोषण, मलेरिया आदि समाप्त करने के लिए पारंपरिक आदिवासी औषधि के प्रोत्साहन और वैज्ञानिक प्रबंधन की बात कही.
इससे पहले पेरू देश की महिलाओं ने अपने विचार रखे. इसके बाद भारत, सीरिया की महिलाओं ने अपने देशों में औरतों के खिलाफ चल रही हिंसा पर शोध पत्र प्रस्तुत किया़ भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष बालाकृष्णा ने भारत का पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि 2013 में क्रिमिनल लॉ में संशोधन किया गया है़.
पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज नहीं करनेवाले पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है़ उन्होंने कहा कि भारत के संसद ने अभी तक महिला आरक्षण का बिल पास नहीं किया है़ औरतों की सुरक्षा के लिए बहुत से कानून हैं, लेकिन इसके बावजूद बलात्कार और हिंसा की वारदात हो रही है़ उन्होंने सीडॉ कमेटी के सदस्य का जबाब देते हुए कहा कि बलात्कार के 782 मामले मानवाधिकार आयोग में दर्ज किए गये हैं. ट्रैफिकिंग पर रोकथाम के कानून के बावजूद ट्रैफिकिंग जारी है़ इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाये जाने चाहिए़ भारत की विभिन्न महिला संगठनों ने औरतों के साथ धर्म के नाम पर हिंसा, साम्प्रदायिक दंगे में औरतों के खिलाफ हिंसा, विकलांग औरतों के मानवाधिकार, यौन हिंसा, ट्रैफिकिंग आदि मामले उठाये. यह सत्र तीन दिनों तक चलेगा.
