रांची : राज्य सरकार के कार्यक्षेत्र के अधीन सरकारी सेवाएं दे रहे प्रज्ञा केंद्रों पर राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है. इसकी कमान केंद्र सरकार के पास है. कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) या प्रज्ञा केंद्र संचालकों पर किसी तरह की कार्रवाई भी नहीं हो सकती. इसके लिए राज्य सरकार दिल्ली स्थित सीएससी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीइअो) को सूचित भर कर सकती है. धनबाद के एक मामले में राज्य सरकार की लाचारी साफ हो चुकी है.
दरअसल, एक से पांच वर्षीय बच्चों को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया राज्य में अब भी धीमी है. मां-बाप बच्चों की जन्मतिथि में बदलाव सहित अन्य मकसद से अपने बच्चों का आधार कार्ड नहीं बनाते. धनबाद के उपायुक्त ने एक से पांच वर्षीय बच्चों को आधार से जोड़ने संबंधी जानकारी अपने जिले के प्रज्ञा केंद्रों से मांगी थी. इसके लिए उन्होंने अपने जिले के सभी प्रज्ञा केंद्र संचालकों का एक वाट्सएप ग्रुप बनाया था. आधार संबंधी सूचना न मिलने पर उन्होंने संचालकों को यथाशीघ्र रिपोर्ट भेजने को कहा. इसके बाद 15 प्रज्ञा केंद्र संचालक उस वाट्सएप ग्रुप से लेफ्ट कर गये. उपायुक्त ने इसकी सूचना आइटी विभाग को दी, पर कुछ नहीं हुआ. दरअसल आइटी (जैप-अाइटी सहित) विभाग के हाथ में कुछ है ही नहीं.
सरकार के एक अधिकारी ने ही कहा कि प्रज्ञा केंद्र क्या कर रहे हैं, क्या नहीं यह सरकार को नहीं पता. उन्हें कोई निर्देश भी देना हो, तो अब सीइअो को कहना पड़ेगा. यह स्थिति ठीक नहीं है. गौरतलब है कि राज्य भर में करीब 20 हजार प्रज्ञा केंद्र निबंधित हैं तथा इनमें से करीब 13 हजार को संचालित बताया जा रहा है. अभी इन केंद्रों में विभिन्न प्रमाण पत्र (जाति, आय, आवासीय) बनाने सहित अन्य सरकारी सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं.
