रांची : झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण (जेएसएमडीएम) ने नौ सीए फर्म को लाभ पहुंचाने के मकसद से नियमों को दरकिनार कर दिया है. यही नहीं, पहले एक्सप्रेस आॅफ इंटरेस्ट (इओआइ) में सीएजी इंपैनलमेंट झारखंड स्थित सीए फर्म, पांच साल का अनुभव एवं पर्याप्त कर्मचारी मांगे गये. अब इओआइ के क्लॉज का उल्लंघन करते हुए 30 साल का कार्य अनुभव वाले फर्मों का किस आधार पर चयन किया गया, यह समझ से परे है. यह बातें सीए नवल किशोर महतो एवं सीए मयंक कुमार ने रविवार को होटल प्रताप रेसीडेंसी में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कही.
इतने सीए फर्म से ऑडिट करना मुश्किल : उन्होंने कहा कि खास बात यह है कि नौ सीए फर्म द्वारा राज्य के 45,000 स्कूलों का ऑडिट करना मुश्किल है, जबकि ग्रामीण विकास विभाग में भी पूरे राज्य से 25 सीए फर्म का इंपैनलमेंट किया जाता है. आखिर किसी भी सरकारी संगठन की ऑडिटर इंपैनलमेंट प्रक्रिया का अलग-अलग मापदंड कैसे तय किया जाता है.
इससे साफ पता चलता है कि अनियमितता बरती जा रही है. कुल चार साल यानी 1,80,000 स्कूलों का ऑडिट करना है. एक सीए फर्म को एक जिला के स्कूलों का ही सही तरीके से ऑडिट करने में तीन माह का समय लगेगा.
ओपनिंग बैलेंस कहां से मिलेगा : उन्होंने कहा कि 2014-15 से 2017-18 तक का ऑडिट करना है, जबकि यह योजना पहले से चल रही है. इसके पूर्व का ऑडिट नहीं हुआ है. ऑडिट के दौरान आखिर ओपनिंग बैलेंस कहां से मिलेगा. इस अनियमिततता को लेकर विभाग के निदेशक, मुख्य सचिव को भी ज्ञापन सौंपा गया है. जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय भी जायेंगे.
