रांची : चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव-2019 के मद्देनजर वैसे अधिकारियों की सूची बनाने का निर्देश दिया है, जो गृह जिले में पदस्थापित हैं.
पिछले तीन साल से एक ही जिले में पदस्थापित अधिकारियों की सूची बनाने का निर्देश भी दिया गया है. इस सूची में वैसे पदाधिकारियों को शामिल करने को कहा गया है, जिनका पदस्थापन 31 मई तक तीन साल हो जायेगा. चुनाव आयोग ने कहा है कि अधिकारियों को उन स्थानों पर पदस्थापित नहीं करना है, जहां 31 मई 2017 से पूर्व का उनका पदस्थापन हो.
भारत सरकार के निर्देश के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एल ख्यांगते ने सभी जिलों के उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र भेज दिया है. इसमें यह भी कहा गया है कि अगर किसी अधिकारियों का पदस्थापन के दौरान प्रमोशन हो जाता है, तो वैसे अधिकारियों को भी तीन साल से अधिक समय तक पदस्थापन वाली सूची में शामिल करना है.
इसमें कहा गया है कि पूर्व में चुनाव कार्य में लापरवाही बरतने के मामले में सजा पाने वाले अधिकारियों को चुनाव के काम में नहीं लगाना है. वैसे अधिकारियों को भी चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाना है, जिनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला चल रहा हो.
डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक व प्राचार्यों पर लागू नहीं होगा हटाने का मामला
चुनाव आयोग ने कहा कि तीन साल से एक स्थान पर पदस्थापित कर्मियों को हटाने का मामला डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक व प्राचार्य पर लागू नहीं होगा.
अगर इनके खिलाफ किसी की कोई शिकायत हो तो इस मामले को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी देखेंगे. छह माह के अंदर सेवा से रिटायर होने वाले कर्मियों को भी चुनाव के कार्य में नहीं लगाना है. इनका तबादला भी जिले से बाहर नहीं करना है. चुनाव आयोग ने कहा है कि जिन अधिकारी और कर्मियों को सेवा विस्तार मिला है या पुनर्नियुक्त किया गया है, उनको भी चुनाव कार्य में नहीं लगाना है.
