मंत्री ने कहा, लगता है वन अधिकारी का काम केवल क्लीयरेंस करना है
रांची : खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय का कहना है कि मेधावी मस्तिष्क ज्यादा समझौता कर रहे हैं. आइएएस हो या आइआइएम के अच्छे संस्थानों के प्रोडक्ट, सभी अपनी संस्था को लाभ पहुंचाने में लगे हैं. इससे व्यवस्था को नुकसान हो रहा है. स्थिति यही रही तो आगे भी होता रहेगा.
इनको जनहित के बारे में सोचना (प्रो पीपुल) चाहिए. उनको सोचना होगा कि नौकरी में क्यों आये थे? अगर विचार के साथ विरोधाभासी हो जायेंगे तो काम के साथ न्याय नहीं कर पायेंगे. श्री राय शनिवार को होटल कैपिटोल हिल में आयोजित बायो डायवर्सिटी बोर्ड की राज्य स्तरीय कार्यशाला में बोल रहे थे. इसमें वन अधिकारियों को बायो डायवर्सिटी एक्ट-2002 के बारे में जानकारी दी गयी. श्री राय ने कहा कि बायो डायवर्सिटी एक अच्छा विषय है. इसमें इकोलॉजी के समन्वय की बात कही जाती है.
इसके लिए कम्युनिटी के पास एक बायो डायवर्सिटी रजिस्टर होगा. इसमें समाज की भागीदारी होगी. उनको इससे होने वाली कमाई का हिस्सा मिलेगा. 1992 के रियो-डि-जिनेरियो में हुए समिट के बाद यह बात सामने आयी. लेकिन, इसको इकोनॉमी से जोड़ दिया गया. इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच तालमेल कैसे होगा, इस पर विचार करना होगा.
कलस्टर बनाकर प्रशिक्षण देने की योजना : एलआर सिंह
झारखंड बायोडायवर्सिटी बोर्ड के अध्यक्ष एलआर सिंह ने कहा कि इस साल मार्च तक 61 प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की योजना है. कलस्टर बनाकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा. अगले साल तक इस काम में अच्छी प्रगति होने की उम्मीद है. इसमें विश्वविद्यालय और रिसर्च स्कॉलरों की मदद ली जायेगी. बायोडायवर्सिटी रजिस्टर बनाने में समिति की मदद ली जायेगी. इसके लिए पंचायत स्तर पर बायोडायवर्सिटी कमेटी का गठन किया जा रहा है. तकनीकी सत्र में आरके सिंह, उतराखंड बायोडायवर्सिटी बोर्ड के धनंजय प्रसाद और अधिवक्ता ऋत्विक दत्ता ने भी विचार रखा. इसमें कई जिलों के वन प्रमंडल पदाधिकारी मौजूद थे.
