रांची : झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ के कार्यकारी अध्यक्ष रामकुमार सिन्हा ने कहा है कि अगर सरकार 14 जनवरी तक संघ की मांगों को पूरा नहीं करती है, तो आंदोलात्मक कार्यवाही की जायेगी. इसके लिए संघ 15 जनवरी के बाद आंदोलन की घोषणा करेगा.
उन्होंने कहा कि सीधी बात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी अंचल अधिकारियाें एवं प्रखंड विकास पदाधिकारियों पर आराेप लगाते हुए उन्हें सरकारी की बदनामी के लिए जवाबदेह मानते हुए सभी की संपत्ति की जांच भ्रष्टाचार निराेधक ब्यूरो से कराने का आदेश दिया है.
बिना जांच के एक परिवाद मात्र के आधार पर झारखंड प्रशासनिक सेवा के मूल कोटि के सभी पदाधिकारियों को आरोपित करना किसी दृष्टिकोण से उपयुक्त नहीं है. अंचल अधिकारी व प्रखंड विकास पदाधिकारी पर बिना किसी जांच के आरोप लगाया जा रहा है.
वहीं मुखिया से मनरेगा अंतर्गत एफटीओ का अधिकार वापस लेते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी को इसके लिए प्राधिकृत किया गया है. अगर झारखंड प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी के कारण सरकार की बदनामी हो रही है, तो उन्हें विकास एवं राजस्व संबंधी कार्यों की जवाबदेही क्यों दी जा रही है.
संघ 2009 से ही प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी के पदों को छोड़ने की मांग करता आ रहा है. उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान की भर्त्सना करते हुए कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि बिना किसी ठोस साक्ष्य के भविष्य में किसी पदाधिकारी के विरुद्ध बेबुनियाद अारोप नहीं लगाये.
सरकार संघ की मांगें पूरी करे : श्री सिन्हा ने सरकार से वेतन विसंगति दूर करने, अनुमंडल पदाधिकारी एवं समकक्ष तथा अपर समाहर्ता एवं समकक्ष के रिक्त पदों पर प्रोन्नति देने, झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित पदाधिकारियाें की सेवा संपुष्टि एवं प्रोन्नति, मनरेगा के अंतर्गत प्रखंड विकास पदाधिकारियों को एफटीओ के कार्य से मुक्त करने, बिहार की तर्ज पर झारखंड प्रशासनिक सेवा को प्रीमियर सेवा घोषित करने, लंबे समय से निलंबित पदाधिकारियों को निलंबनमुक्त करने, आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने, चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान करने व एलटीसी की सुविधा देने की मांग की.
