मनोज सिंह
रांची : रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइकेट्री एंड एलायड साइंस (रिनपास) के वर्तमान निदेशक सहित 18 अधिकारियों-कर्मचारियों की नियुक्तियां अवैध हैं.
रिनपास की ओर से वर्ष 2004 में बनायी गयी स्टाफिंग पैटर्न पर वित्त विभाग की स्वीकृति मांगे जाने से संबंधित फाइल पर महाधिवक्ता ने यह राय दी है. स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2004 में हुई नियुक्ति के मामले में महाधिवक्ता की राय मांगी थी. महाधिवक्ता ने अपनी राय में कहा है कि वर्ष 2004 में हुई नियुक्ति में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है.
उस वक्त संस्थान के वर्तमान निदेशक डॉ सुभाष सोरेन व पूर्व निदेशक सहित करीब डेढ़ दर्जन अधिकारी और कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी. संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ अमूल रंजन सिंह ने वर्ष 2011 में अपने कार्यकाल में वर्ष 2004 में बहाल किये गये अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए वित्त विभाग से कुछ संशोधन और नयी स्टाफिंग पैटर्न पर अनुमोदन मांगा था. वित्त विभाग ने अनुमोदन देने से पूर्व की प्रक्रिया के बारे में विभाग से जानकारी ली.
स्वास्थ्य विभाग को पता चला कि इस मामले में स्टाफिंग पैटर्न का पालन नहीं किया गया है. इसके बाद विभाग ने इस मामले में महाधिवक्ता की राय मांगी थी.
विभागीय मंत्री की अनुमोदन के बाद कर ली गयी है नियुक्ति
सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मानक को पूरा करने के लिए रिनपास ने विभाग से स्टाफिंग पैटर्न को अनुमोदन करने का आग्रह किया था. इसके बाद विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली एक सब कमेटी ने स्टाफिंग पैटर्न को अनुमोदित कर दिया था. इस अनुमोदन को रिनपास प्रबंध समिति ने भी सहमति जता दी थी.
इस सहमति पर विभागीय मंत्री का अनुमोदन भी प्राप्त कर लिया गया था. जबकि, वर्ष 1998 में बने स्टाफिंग पैटर्न पर तत्कालीन बिहार सरकार की सहमति ली गयी थी. वर्ष 2004 में बने नये स्टाफिंग पैटर्न पर वित्त विभाग और राज्य सरकार की सहमति अब तक नहीं मिली है. महाधिवक्ता ने अपनी राय देते हुए कहा है कि वर्ष 2004 में बनी स्टाफिंग पैटर्न पर सरकार की सहमति नहीं होने की वजह से नियुक्त वैध नहीं है.
जिन महत्वपूर्ण अधिकारियों की नियुक्ति की गयी है
डॉ सुभाष सोरेन (वर्तमान निदेशक), डॉ जयति शिमलई (पूर्व निदेशक), डॉ जय प्रकाश, डॉ कप्तान सिंह सेंगर, डॉ पीके सिंह, डॉ भुवन ज्योति. इसके अतिरिक्त 10 साइकेट्रिक सोशल वर्कर और दो कर्मचारी.
