रांची : संग्रहालय ज्ञान का केंद्र है, इसे समृद्ध करने की दिशा में किया जा रहा प्रयास

राज्य संग्रहालय. कला-संस्कृति विभाग के निदेशक अशोक कुमार सिंह ने कहा रांची : कला-संस्कृति विभाग के निदेशक अशोक कुमार सिंह ने कहा कि संग्रहालय ज्ञान का केंद्र है, इसलिए इसे समृद्ध करने की दिशा में पहल चल रही है. संस्कृति विभाग लगातार इस प्रयास में लगा हुआ है. वह गुरुवार को पर्यटन, कला-संस्कृति विभाग द्वारा […]

राज्य संग्रहालय. कला-संस्कृति विभाग के निदेशक अशोक कुमार सिंह ने कहा
रांची : कला-संस्कृति विभाग के निदेशक अशोक कुमार सिंह ने कहा कि संग्रहालय ज्ञान का केंद्र है, इसलिए इसे समृद्ध करने की दिशा में पहल चल रही है.
संस्कृति विभाग लगातार इस प्रयास में लगा हुआ है. वह गुरुवार को पर्यटन, कला-संस्कृति विभाग द्वारा होटवार स्थित राज्य संग्रहालय में आयोजित संग्राहलय सप्ताह के शुभारंभ के मौके पर बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि इतिहास, पुरातत्व, कला-संस्कृति से जुड़ी अनेक किताबों का क्रय किया जा चुका है. इस वर्ष भी विज्ञान व दर्शन की प्रसिद्ध किताबों का क्रय किया जाना है.
विशिष्ट अतिथि डॉ आइके चौधरी ने कहा कि संग्रहालय के बिना हम बहुत सारी जानकारियों से वंचित रह जाते हैं. गीता ओझा ने कहा कि अतीत दो प्रकार का होता है, एक मृत अतीत और दूसरा जीवित अतीत. मृत अतीत का साक्ष्य संग्रहालय में मिलता है और जीवित अतीत के दर्शन प्रतियोगिता के प्रदर्शन से होते हैं. गिरिधारी राम गोंझू ने कहा कि संग्रहालय अतीत का दर्पण है. यहां हम अतीत के दर्शन कर सकते हैं.
मानव-सभ्यता और संस्कृति की विकास गाथा संग्रहालय में संग्रहित है. हमारे लिए यह प्रेरणा का स्रोत है. स्वागत भाषण संग्रहालयाध्यक्ष डॉ मो शरफउद्दीन ने किया. उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम 18 दिसंबर तक चलेगा. कार्यक्रम का संयोजन विपुल नायक व मंच संचालन डॉ कमल कुमार बोस ने किया. मौके पर विजय पासवान, मनोज पासवान, दीप ज्योति सहित पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे.
सांस्कृतिक कार्यक्रम ने लोगों का मन मोहा
संग्रहालय सप्ताह के उदघाटन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें नाजिया नाज की टीम ने नागपुरी नृत्य की प्रस्तुति दी.
विपुल नायक के दल ने गणेश वंदना व नृत्य की प्रस्तुति दी. कार्यक्रम में शास्त्रीय व उपशास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. शास्त्रीय व उप-शास्त्रीय नृत्य प्रतियाेगिता में रांची, धनबाद, कोडरमा के लगभग 300 प्रतिभागियों ने भाग लिया. निर्णायक मंडली में गार्गी सोम व पी शालिनी शामिल थीं. कार्यक्रम में कलाकारों की प्रस्तुति को लोगों ने सराहा.

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