रांची : केंद्रीय सरना समिति (फूलचंद तिर्की गुट) ने शनिवार को राजभवन के समक्ष धरना दिया. धरना के बाद राज्यपाल को ज्ञापन सौंप कर मांग की गयी है कि धर्मांतरित आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र नहीं दिया जाये. इसके अलावा कुछ लोगों के द्वारा आयोजित विदेशी संस्कृति से संबंधित (चुंबन प्रतियोगिता) आयोजन पर प्रतिबंध लगाया जाये. समिति ने मांग की है कि झारखंड आंदोलनकारियों को मान-सम्मान दिया जाये अौर झारखंड आंदोलनकारी कमल किशोर भगत व अलयेस्टर बोदरा को अविलंब रिहा किया जाये.
सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर चर्च द्वारा हड़पी गयी जमीन की जांच कर मूल रैयत को वापस करने की मांग की गयी. रिम्स में होनेवाली बहाली में विस्थापितों अौर स्थानीय लोगों को बहाल करने की भी मांग की गयी. धरना को संबोधित करते हुए समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि आज सरना अादिवासयों का धर्म, संस्कृति, रीति-रिवाज खतरे में है. कार्यकारी अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि किसी भी हालत में झारखंड को रोम, इटली नहीं बनने दिया जायेगा. इस अवसर पर महासचिव संजय तिर्की, जगलाल पाहन, चेतु उरांव, शोभा कच्छप, नीरा टोप्पो, अंजू टोप्पो, किरण तिर्की, हांदू भगत आदि उपस्थित थे.
