ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आ रहे बदलाव व चुनौतियों पर हुई चर्चा
रांची : रेगुलेटरी फ्रेमवर्क इन इलेक्ट्रिसिटी इंडस्ट्रीज इन इंडिया, चैलेंजेज, गवर्नेंस एंड फ्यूचर रोडमैप विषय पर गुरुवार को होटल बीएनआर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आरंभ हुआ. संगोष्ठी का आयोजन एनपीटीअाइ, पोसोको और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है. संगोष्ठी में वक्ताओं ने ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आ रहे बदलावों, सौर ऊर्जा की चुनौतियां और 24 घंटे सातों दिन बिजली उपलब्ध कराने की चुनौतियों पर चर्चा की.
मुख्य अतिथि झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 बनने के बाद से लगातार बिजली के क्षेत्र में प्रगति हो रही है. नित्य नये-नये रेगुलेशन में बदलाव हो रहे हैं, जिसकी जानकारी होना उत्पादन, संचरण और वितरण से जुड़े अधिकारियों के लिए आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि टैरिफ के बाद कई रेगुलेशन आते हैं, पर इसका लाभ जनता को नहीं मिल पाता है. वजह है कि उन तक जानकारी पहुंच नहीं पाती है. एेसे में वितरण कंपनियों की जवाबदेही बनती है कि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारी जानकारी दें. अध्यक्ष ने कहा कि बिजली उत्पादन और संचरण कंपनियां लाभ में रहे इसके लिए जरूरी है कि पहले वितरण कंपनी लाभ में रहे और स्वस्थ रहे. क्योंकि उत्पादन और संचरण कंपनियों के उपभोक्ता वितरण कंपनियां होती हैं. वर्ष 2003 के बाद से बिजली की अलग-अलग कंपनियां काम करने लगी हैं.
आयोग बने, कंज्यूमर ग्रिवांस सेल बने, पर उपभोक्ताओं को समझ में नहीं आता कि कहां जायें और कहां नहीं. इसलिए रेगुलेटर्स भी नियमों को सरल करें, ताकि उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिल सके.
शत प्रतिशत बिलिंग करना चुनौती : ऊर्जा सचिव वंदना डाडेल ने कहा कि उत्पादन, संचरण और वितरण में तेजी से आधारभूत संरचना का निर्माण हो रहा है. झारखंड में वितरण व्यवस्था सुदृढ़ हुई है. पर विकसित राज्यों की तुलना में अभी भी लंबी दूरी तय करनी है. टीएंडडी लॉस चिंता का विषय है. बिलिंग शत प्रतिशत करना चुनौती है.
ऐसे में पारदर्शी तरीके से काम करना होगा. झारखंड बिजली वितरण निगम के एमडी राहुल पुरवार ने कहा कि अभी तक दो वर्षों में 30 लाख नये घरों में बिजली के कनेक्शन दिये गये हैं. सौभाग्य योजना से दिसंबर तक राज्य के सभी घरों में बिजली कनेक्शन दे दिये जायेंगे. ऐसी स्थिति में सबको बिलिंग करना एक चुनौतीभरा काम होगा. डीवीसी के पूर्व अध्यक्ष आरएन सेन ने कहा कि बिलिंग की सुविधा प्रीपेड मीटर से उपलब्ध करायी जा सकती है.
अॉपरेशनल इंटीग्रिटी को मेंटेन रखना होगा
अध्यक्षता करते हुए एनपीटीअाइ के महानिदेशक राजेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि देश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बहुत तेजी से प्रगति कर रहा है, जिसे ग्रिड से जोड़ना चुनौतीपूर्ण कार्य है. 2022 तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापना के लक्ष्य को हासिल कर लिया जायेगा.
घरों में रूफ टॉप सोलर पावर प्लांट लोग लगा रहे हैं. ऐसे प्लांटों से अतिरिक्त बिजली को ग्रिड तक लाना एक बड़ी चुनौती होगी. इसके लिए ग्रिडों में बदलाव की जरूरत है. अॉपरेशनल इंटीग्रिटी को मेंटेन रखना होगा. स्मार्ट सिस्टम से ही रिमोट एरिया तक बिजली की उपलब्धता बनायी रखी जा सकती है. रिमोट एरिया में माइक्रो ग्रिड से बिजली 24 घंटे दी जा सकती है. जहां तक बिलिंग की समस्या है तो इसके लिए प्रीपेड मीटरिंग बेहतर उपाय है.
अलग-अलग राज्यों के विशेषज्ञों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम को बीपीएससीएल के जीएम आर कुमार, इआरपीसी के सदस्य सचिव जे बंदोपाध्याय, इआरएलडीसी पोसोको के जीएम एस बनर्जी, डीइ भार्गव ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं.
मुख्य रूप से पावर ग्रिड, एनटीपीसी, पीटीसीएल, प.बंगाल विद्युत विकास निगम, डीवीसी, छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन निगम, टाटा पावर, तीस्ता ऊर्जा, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन, आइएक्स जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं. शुक्रवार को शाम चार बजे से आयोजित समापन समारोह को विकास अायुक्त डीके तिवारी संबोधित करेंगे.
