रांची : नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह ने सोमवार को हरमू नदी के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण किया. हरमू नदी की स्थिति देख सचिव ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकारा.
कहा : नदी के सौंदर्यीकरण का मकसद इसके पानी को स्वच्छ बनाना था. नदी को इस लायक बनाना था कि आसपास के इलाके के लोग सुबह शाम टहल सकें. लेकिन, यहां तो पूरे शहर का गंदा पानी हरमू नदी में गिर रहा है.
श्री सिंह ने कहा कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता जरूरत के मुताबिक कम है. पानी साफ करने के लिए और भी प्लांट लगाने की जरूरत है.
उन्होंने निर्देश दिया कि एक माह के अंदर हरमू नदी में गिर रहे सभी नालों के सामने जाली लगायी जाये. साथ ही नदी में गिरनेवाले नालों को पहले ही एसटीपी से साफ करने की व्यवस्था की जाये. कहा कि नेचुरल प्रोसेस के अलावा कन्वेंशनल प्रोसेस से भी नालों के पानी को साफ कर नदी में लाने का प्रयास होना चाहिए. उन्होंने हरमू मुक्तिधाम से लेकर रेलवे पुल तक जगह-जगह बने एसटीपी और पाथवे का भी निरीक्षण किया.
स्वर्णरेखा नदी के घाघरा घाट का भी निरीक्षण किया : स्वर्णरेखा नदी के घाघरा घाट पर किये जा रहे कार्य की भी जानकारी ली. पाथवे को स्वर्णरेखा से लेकर हरमू-विद्यानगर तक नदी के मुहाने पर दोनों तरफ कनेक्ट करने और जरूरत पड़ने पर सड़कों या रेलवे को क्रॉस करने के लिए ब्रिज या अंडरपास बनाने के निर्देश दिये. कहा कि पाथ वे पर प्लांटेशन भी किया जाये.
नदी के किनारे चल रहे नालों से निकलने वाले गोबर व गंदे पानी के लिए जगह-जगह पर बायोगैस प्लांट लगाया जाये. ड्रेनेज की जाली के पास निकलने वाले सॉलिड वेस्ट कि नियमित सफाई कराने के लिए जरूरत के मुताबिक मैनपावर का इस्तेमाल करें. श्री सिंह ने नये एसटीपी और कन्वेंशनल टेक्नोलॉजी के आधार पर वॉटर फिल्ट्रेशन के लिए डीपीआर बनाने की जरूरत बतायी.
10.5 किमी सौंदर्यीकरण व संरक्षण का कार्य हुआ
हरमू नदी में 10.5 किमी सौंदर्यीकरण और संरक्षण का कार्य हुआ है. पुरानी योजना के तहत आठ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाये जाने थे. उनमें से सात प्लांट ने काम करना शुरू कर दिया है.
निरीक्षण में ये लोग थे मौजूद : निरीक्षण के दौरान जुडको के प्रोजेक्ट डायरेक्टर तकनीकी एसके साहू, रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड के पीआरओ अमित कुमार, जुडको के कई अधिकारी व ईगल इंफ्रा कंपनी के पदाधिकारी मौजूद थे.
