रांची : अरगोड़ा से अपहृत जूता-चप्पल व्यवसायी उदय ठाकुर हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए अरगोड़ा पुलिस उसके शव का फोरेंसिक जांच करायेगी. पुलिस के अनुसार फोरेंसिक जांच से बल्ड ग्रुप, शव महिला का है या पुरुष का और मौत की वजह स्पष्ट हो पायेगी.
हालांकि, पुलिस के अनुसार शव उदय ठाकुर का है या किसी और का, इसके लिए शव के डीएनए का मिलान उसके परिजनों से नहीं किया जायेगा. क्योंकि आरोपी राजेश कुमार की निशानदेही पर शव मिला था. इसके अलावा शव की पहचान हुलिया के आधार पर उदय ठाकुर के परिजनों ने भी की है. चूंकि शव पुराना हो चुका है, इसलिए शव का पोस्टमार्टम कराने के बजाय फोरेंसिक जांच होगी.
अफीम का पैसा नहीं दे रहा था उदय : उल्लेखनीय है कि गिरफ्तार राजेश और उदय के कंकाल को लेकर रांची पुलिस की टीम शनिवार की देर रात चतरा से रांची पहुंच गयी थी. पुलिस ने रविवार को राजेश से पूछताछ की.
उसने बताया कि उदय ठाकुर का दोस्त मनीष बराबर कोलकाता आया-आया जाता करता था. राजेश ने मनीष को करीब आठ लाख रुपये की अफीम बेचने के लिए दी थी. जिसे बाद में मनीष ने उदय को दे दिया था. लेकिन वह अफीम का पैसा वापस नहीं कर रहा था. मनीष ने उस पर पैसा के लिए काफी दबाव बनाया था. लेकिन वह पैसे की बात पर हमेशा टाल-मटोल कर जाता था. दूसरी तरफ, अफीम तस्करों का दबाव राजेश पर था. इस वजह से उसने उदय को किडनैप कर फिरौती के रूप में पैसा वसूलने का निर्णय लिया.
लेकिन उदय पैसा देने को तैयार नहीं था, इस वजह से उसकी हत्या कर दी गयी. परिजनों ने भी राजेश से इस बिंदु पर काफी पूछताछ की कि उसने उदय की हत्या क्यों की. इस पर उसने बताया कि वह हत्या नहीं करना चाहता था. उसे सिर्फ अफीम के पैसे चाहिए थे, लेकिन पैसा नहीं मिलने पर उसने अन्य लोगों के साथ मिल कर उसकी हत्या कर दी.
एक अक्तूबर को ही हो गया था अपहरण : उल्लेखनीय है कि उदय के अपहरण को लेकर अरगोड़ा थाना में सात अक्तूबर को केस दर्ज हुआ था. जबकि उसका अपहरण एक अक्तूबर को कर लिया था. अपहरणकर्ता उसे बोलेरो में बैठा कर हजारीबाग डोभी के रास्ते लेकर हंटरगंज पहुंचे थे. बोलेरो में उदय के साथ मनीष, राजेश और छोटू भी थे.
इसके बाद बीच रास्ते में उदय को नशीली पदार्थ सूंघाकर बेहोश कर दिया गया. दो अक्तूबर को दिन के दो बजे सुबह सभी लोग उदय को लेकर केदली चट्टी स्थित मनीष के घर पहुंचे. वहां से सुबह छह बजे उदय को चकला जंगल स्थित ललमटिया पहाड़ पर ले जाकर उसकी हत्या कर दी गयी. इसके बाद शव को जंगल में ही छोड़ दिया गया.
