रांची : अलग राज्य गठन के आज 18 साल भले हो गये हों, लेकिन आज भी इस राज्य की जनता मूलभूत सुविधा से वंचित है. जिस विकास की हम बात कर रहे हैं, उसमें केवल 30 प्रतिशत लोग ही अपग्रेड हुए हैं. बाकी के 70 प्रतिशत लोग जो गांवों में रहते हैं, उनकी समस्या जस की तस है. ये बिरसा के सपनों का झारखंड नहीं है. यह बातें आजसू सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो ने गुरुवार को बिरसा मुंडा समाधि स्थल कोकर में कही.
श्री महतो बिरसा के अनुयायी बिरसाइत की प्रार्थना सभा में पहुंचे थे़ बिरसाइतों के साथ श्री महताे ने धरती आबा को याद किया़ उन्होंने कहा कि राज्य की स्थापना के बाद वर्ष तो बढ़ते गये, लेकिन हमारे लोग पीछे छूटते गये़
राज्य हासिल हुए 18 साल हो गये, लेकिन गांव के लोग और हमारे विचार स्थापित नहीं हो सके़ इसलिए अलग राज्य गठन के उद्देश्य क्या थे, इस पर बहस हो और इसमें सबको शामिल होना पड़ेगा़
किसी दूसरे देश या राज्य को मानक मानकर हम काम नहीं कर सकते़ उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचना और औद्योगिकीकरण की होड़ में झारखंड को जिस अलग दिशा में अलग विचारों को साथ चलना था, वह डगमगाता रहा़ राज्य को एक स्पष्ट दिशा की जरूरत है़
उन्होंने कहा कि बिरसाइत अनुयायियों को नमन करता हू़ं हजारों परिवार आज भी जंगलों में बिरसा धर्म का पालन कर रहे हैं. बिरसा के मूल्यों पर आज भी ये लोग आस्था रखते हैं. इधर बिरसा के समाधि स्थल पर सुबह मनोहरपुर से सौ से अधिक की संख्या में बिरसाइत धर्म को मानने वाली महिला, पुरुष व युवा भी पहुंचे हुए थे.
यहां उन्होंने अपनी पारंपरिक शैली में भगवान बिरसा की पूजा-अर्चना की. भगवान बिरसा को माला पहनायी व प्रतिमा के चाराें ओर घूम-घूम कर भगवान बिरसा की आराधना की. मौके पर श्री महतो के साथ संजय बसु मल्लिक, डॉ देवशरण भगत, सुबोध प्रसाद, बिरसा मुंडा, सरजीत मिर्धा, सिद्धार्थ महतो, ललित ओझा, ज्ञान सिन्हा, बनमाली मंडल, रामदुर्लभ सिंह मुंडा, आदिल अजीम, सुनील यादव सहित पार्टी के सैकड़ों लोग उपस्थित थे़
