दुर्गा दाल मिल का कारनामा
रांची : रातू रोड, पंडरा स्थित श्री दुर्गा दाल मिल में मिलावट किया जाता है. यहां दाल में मेटानिल येलो रंग मिलाया जाता है. इस रंग का औद्योगिक प्रयोग होता है तथा इसके खाने से कैंसर होने का खतरा है. इस बात की पुष्टि खाद्य जांच प्रयोगशाला, नामकुम में उक्त मिल के अरहर दाल की जांच में हुई है. प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि यह रंग मिलाने के कारण यह दाल खाने योग्य नहीं है.
गौरतलब है कि सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीअो) ने शिकायत के बाद 24 अक्तूबर को श्री दुर्गा दाल मिल में छापेमारी की थी. उस दौरान वहां बड़े-बड़े ड्रम में दाल रखी थी. साथ ही उस वक्त दाल को गंदे पानी में धोया जा रहा था तथा इसे रंगने की तैयारी चल रही थी. दाल जियो एग्री प्रोडक्ट्स के लेबल लगे बोरे में रखी थी. छापेमारी के बाद जिला खाद्य संरक्षा पदाधिकारी एलबी सिंह ने अरहर दाल के सैंपल को जांच प्रयोगशाला में भेजा था.
हानिकारक है यह रंग : पुड़िया वाला पीला या गंधक रंग अखाद्य रंग है.
इसे मेटानिल येलो भी कहा जाता है. यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है व रोग जनित भी. इसके सेवन से जिगर व यकृत संबंधी रोग तथा कैंसर भी हो सकता है. इधर, राजधानी रांची में मेटानिल येलो का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है. खास कर मिठाइयों में. शहर के ज्यादातर होटलों व सड़क किनारे बेचे जा रहे लड्डू, बुंदिया, जलेबी, मंचुरियन, छोले व चार्ट में इस रंग का खूब इस्तेमाल हो रहा है. इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए़
