एनएपीएम के प्रतिनिधियों ने कहा
संविधान सम्मान यात्रा खूंटी व सिमडेगा के लिए रवाना
रांची : जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) की संविधान सम्मान यात्रा सोमवार को खूंटी व सिमडेगा गयी. इससे पूर्व इसके सदस्य प्रेस क्लब सभागार में संवाददाताओं से रूबरू हुए.
जनांदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के झारखंड समन्वयक बसंत हेतमसरिया ने कहा कि यह प्रचारित किया जाता है कि विकास देखना है, तो झारखंड आयें, पर वस्तुस्थिति यह है कि यदि सरकारी दमन देखना है, तो झारखंड आयें. झारखंड में यात्रा के दो दिनों के दौरान इसके सदस्य रांची के नगड़ी, रामगढ़ के कुंदरिया, हजारीबाग के बड़कागांव, खूंटी के उलिहातू और सिमडेगा के लचड़ागढ़ गये और वहां के लोगों के साथ संवाद किया. उन्हें भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लेखित बातों को लागू कराने का संकल्प भी दिलाया़
उन्होंने कहा कि यह यात्रा लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, विविधता, समता व न्याय के लिए और नफरत, असमानता, हिंसा व संसाधनों की लूट के खिलाफ निकाली गयी है. पुणे की सुनीति एसआइ ने कहा कि सरकार को विनाश की नहीं, विकास की राह पकड़नी चाहिए. धर्मनिरपेक्षता को धोखा दिया जा रहा है़ मदुरई की गैब्रिएला डिट्रिच ने कहा कि आदिवासियों से जंगल और उनकी खेती छीनी जा रही है, वहीं पूंजीवादियों को पैसे बनाने का अवसर दिया जा रहा है़
संविधान के अनुरूप शासन चाहता है समाज
दिल्ली के राजेंद्र रवि ने कहा कि भारतीय समाज संविधान का सम्मान करता है और इसी के अनुरूप शासन भी चाहता है, पर सरकारें इसकी उपेक्षा करती हैं. साहेबगंज, गोड्डा सहित कई जगहों पर विकास के नाम पर विनाश हो रहा है. विरोध करनेवालों को देशद्रोही आैर अरबन नक्सल कहा जाता है.
सुनीता रानी ने कहा कि गांवों में ही रोजगार का सृजन होना चाहिए़ हैदराबाद की मीरा ने कहा कि झारखंड संघर्षों की भूमि है. यहां दमन जितना बढ़ता है, प्रतिरोध भी उतना ही बढ़ता है़ इस अवसर पर मेधा पाटकर का पत्र भी पढ़ कर सुनाया गया. मौके पर नर्मदा बचाओ आंदोलन के रोहित, दिल्ली के आर्यमन व मुंबई के अनूप भी मौजूद थे़
