संत अन्ना धर्मसमाज ने हड़गड़ी की 23वीं वर्षगांठ मनायी
रांची : ऑग्जीलरी बिशप तेलेस्फोर बिलुंग ने कहा कि अंत के दिनों में लोगों को अपने होश-हवास, चेतनता में बने रहना चाहिए़ अक्सर ऐसे समय में लोग अपना विवेक खो देते है़ं बाइबल में नोआ, सोदोम और गोमोरा व एमाउस के दो यात्रियों के दृष्टांत आदि में इसके उदाहरण है़ं पीढ़ियों के अंत के समय ज्यादातर लोग सांसारिकता की बातों में फंसे रहे़ पर ऐसी परिस्थितियों में भी हमें अपने विश्वास पर बने रहना है़ इसे बनाये रखने के लिए आध्यात्मिकता चाहिए, जो माता बेर्नादेत्त के कैरिज्म में मौजूद है़
इसे जारी रखना है़ वे संत अन्ना धर्मसमाज की संस्थापक माता बेर्नादेत्त व उनकी सहयोगी सिसिलिया, वेरोनिका व मेरी की मूलमठ में हड़गड़ी के 23 वर्ष पूरे होने पर धन्यवादी मिस्सा में संदेश दे रहे थे़ इस अवसर पर ऑग्जीलरी बिशप, सुपीरियर जेनरल सिस्टर लिंडा मेरी वॉन व रांची प्रोविंस की प्रोविंशियल सिस्टर सोसन बाड़ा ने गीत पुस्तक ‘तेरी ध्वनि’ का लोकार्पण भी किया़ इससे पूर्व हड़गड़ी स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया. कार्यक्रम में फादर एलेक्स एक्का, फादर क्लेमेंट एक्का, फादर माइकल नाग, फादर काजीतन सहित बड़ी संख्या में धर्मसमाजी मौजूद थे़
माता बेर्नादेत्त विकास मेला का समापन
दूसरी तरफ, संत अन्ना मूलमठ, पुरुलिया रोड में विभिन्न राज्यों में सिस्टर्स द्वारा संचालित ग्रामीण महिलाओं द्वारा उत्पादित वस्तुओं का तीन दिवसीय माता बेर्नादत्त विकास मेला सोमवार को संपन्न हो गया. मेले में 22 स्टॉल लगे थे, जिनमें आचार, जड़ी- बूटियों से निर्मित दवाइयां, कंदमूल से निर्मित पौष्टिक आहार, अरसा, चना, मूंगफली, चिउड़ा, सुखाये हुए चाकोड़, चेंच, सनई व फुटकल साग, स्वेटर, मफलर, शॉल, कढ़ाई वाले बेडशीट, पिलो कवर व बैग आदि उपलब्ध थे़ लोगों में इन उत्पादनों की अच्छी मांग रही़ अायोजन में सिस्टर सेवती पन्ना, सिस्टर शशिलता लकड़ा, सिस्टर सोसन बाड़ा, सिस्टर ललिता रोशनी लकड़ा, सिस्टर एमेल्डा सोरेंग, सिस्टर फ्लोरेंसिया मिंज, सिस्टर लिली ग्रेस टोपनो, सिस्टर जूली खाखा, सिस्टर निर्मला ज्योति कच्छप, सिस्टर मेरी पुष्पा आदि ने योगदान दिया़
