रांची : जीएसटी परिषद के सदस्य महेंद्र सिंह सहित सीजीएसटी, एसजीएसटी, जीएसटीएन, डीजीजीएसटी और सीबीआइसी के वरीय अधिकारियों ने बुधवार को चेंबर भवन में व्यापारियों और उद्यमियों के साथ बैठक की. जीएसटी परिषद के सदस्य महेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य जीएसटी और केंद्र जीएसटी दोनों नोटिस नहीं भेज सकते हैं. इंफोर्समेंट टीम को छोड़ कर ऐसा अधिकार किसी को नहीं है. यदि एक ने किसी व्यापारी को नोटिस दिया है, तब दूसरे को नोटिस भेजने का अधिकार नहीं है. श्री सिंह दोनों ओर से नोटिस आने के मुद्दे पर व्यापारियों के सवालों का जवाब दे रहे थे.
श्री सिंह ने कहा कि ई-वे बिल के माध्यम से भी माल का आवागमन सुगम बनाया गया है. काउंसिल के पास प्राप्त होनेवाले मामलों व सुझावों की समीक्षा नियमित रूप से होती है.
इस दौरान व्यापारियों ने वरीय अधिकारियों के सामने कई प्रश्न रखे. इसका समाधान मौके पर किया गया. सदस्यों ने कहा कि आइएमएफएल, पेट्रोल, डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए. राज्य एवं केंद्र दोनों जीएसटी विभाग से डीलरों को नोटिस दिये जा रहे हैं. इससे व्यवसायियों को कठिनाई हो रही है. दो पहिया वाहनों के स्पेयर पार्ट्स पर वर्तमान में निर्धारित 28% जीएसटी दर को 12 प्रतिशत करने की मांग की गयी.
बैठक में अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल, एसजीएसटी के आयुक्त राहुल शर्मा, डीजीजीएसटी के एडीजी योगेंद्र गर्ग, सीजीएसटी के प्रधान आयुक्त जेके झा, शशांक प्रिया, मोनिका बत्र, दीप्ति जयराज, एसके रहमान, एके पांडेय, चेंबर के महासचिव कुणाल अजमानी, उपाध्यक्ष दीनदयाल वर्णवाल, सह सचिव प्रवीण जैन छाबड़ा आदि मौजूद थे.
अंतिम तिथि में नेटवर्क हो जाता है फेल : दीपक मारू
चेंबर अध्यक्ष दीपक मारू ने कहा कि जीएसटी के लागू हुए 16 माह बीत गये. इस दौरान 100 से अधिक अधिसूचना व सर्कुलर निकाले गये. सभी संशोधन व्यापारियों की सुविधाओं को देखते हुए किये गये हैं. रिटर्न फाइलिंग की अंतिम तिथि के दिन नेटवर्क हमेशा फेल हो जाता है, इस कारण भारी परेशानी होती है.
