स्वराज स्वाभिमान यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत 27 से
रांची : आजसू पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो स्वराज स्वाभिमान यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत 27 अक्तूबर से करेंगे़ दूसरे चरण की यात्रा को लेकर पार्टी ने तैयारी पूरी कर ली है़ खरसावां शहीद स्थल से यात्रा की शुरुआत होगी़
यात्रा के दौरान श्री महतो 59 गांवों से गुजरेंगे़ वह चक्रधरपुर, सरायकेला, ईचागढ़ के गांवों में चौपाल लगायेंगे़ ग्रामीणों के साथ संवाद करेंगे़
पार्टी प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने बताया कि दूसरे चरण में श्री महतो 92 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे़ ग्रामीणों के साथ संवाद कर गांवों में रात गुजारेंगे़ इस दौरान वह 34 पंचायतों में जायेंगे़ डॉ भगत ने बताया कि श्री महताे 29 और 30 अक्तूबर को चक्रधरपुर, 31 अक्तूबर को सरायकेला तथा एक और दो नवंबर को ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के गांवों में पदयात्रा करेंगे़
इस बीच 28 अक्तूबर को मनोहरपुर में पार्टी द्वारा मिलन समारोह का आयोजन किया जायेगा़ इसमें विभिन्न दलों के नेता और कार्यकर्ता आजसू में शामिल होंगे़ 27 अक्तूबर की सुबह खरसावां विधानसभा क्षेत्र के जिलिंग्दा में स्थानीय लोगों द्वारा इस यात्रा का स्वागत किया जायेगा़ इसके बाद श्री महतो अरवा गांव पहुंच कर यात्रा की शुरू करेंगे़ अरवा से यह यात्रा डोरो, सेरेंगदा, दामदिरी, चमपद, इचाहातू पुनिदिरी और तोड़ामडीह पहुंचेगी़
डाॅ भगत ने कहा कि कुचाई में श्री महतो झारखंड के आंदोलनकारी, पारा शिक्षकों के प्रतिनिधि, जंगल बचाओ कार्यक्रम से जुड़े आंदोलनकारी, पंचायत प्रतिनिधि, महिला कार्यकर्ता और जमीन–गांव से जुड़े बुद्धिजीवियों के साथ संवाद करेंगे़ इसी तरह सरायकेला, चक्रधरपुर और ईचागढ़ में भी आम लोगों के साथ बातचीत करेंगे़
यात्रा से परिवर्तन की उम्मीद जगी है : सुदेश
सुदेश महतो ने कहा है कि स्वराज स्वाभिमान यात्रा से पूरे राज्य में एक अलग किस्म का वातावरण तैयार होता हुआ दिख रहा है़ पहले चरण की यात्रा ने आम लोगों के बीच परिवर्तन की उम्मीद जगायी है़ झारखंडी विचारधारा तथा जमीनी विषयों पर बोलने की ताकत दी है़
इस यात्रा का मकसद है कि आम आदमी की आवाज और सवाल सियासत और सत्ता को सुनने–सुलझाने के लिए बाध्य करे़ इससे पहले श्री महतो ने गांधी जयंती के मौके पर दो अक्तूबर से स्वराज स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत मांडू से की थी़ पहले चरण में दस दिनों की यात्रा के दौरान मांडू, गोमिया, बेरमो, डुमरी, सिंदरी में सौ जगह चौपाल लगाकर समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद किया था. उन्होंने कई गांवों की पदयात्रा की थी.
