रांची : एचइसी ने जेएन कॉलेज के लिए रांची विवि द्वारा मांगी गयी जमीन पर सकारात्मक रुख दिखाया है. एचइसी व विवि अधिकारियों के बीच हुई वार्ता में एचइसी ने विवि को बताया कि जमीन सरकार के माध्यम से दी जायेगा. इसके लिए प्रस्ताव सरकार काे दिया जायेगा.
विवि प्रशासन ने एचइसी प्रबंधन से कॉलेज के लिए 10 एकड़ जमीन मांग की है.जेएन कॉलेज धुर्वा की जमीन कॉलेज के नाम से नहीं है. इस कारण कॉलेज का विकास कार्य प्रभावित हो रहा है. कॉलेज का भवन भी एचइसी का ही है. कॉलेज 1972 से संचालित है. प्रारंभ में कॉलेज का संचालन भी एचइसी प्रबंधन द्वारा किया जाता था. कॉलेज बाद में रांची विवि की अंगीभूत इकाई हो गयी. इसके बाद से कॉलेज का संचालन विवि द्वारा किया जा रहा है. यहां इंटर व स्नातक स्तर की पढ़ाई होती है.वोकेशनल कोर्स का भी संचालन होता है.
नरेंद्र िसंह नीरू,
पहाड़ी मंदिर विकास समिति के सदस्य
वर्ष 1992 से 1998 तक पहाड़ी मंदिर विकास समिति का सदस्य रहा. दिन-रात भोले बाबा की सेवा की. आज जब पहाड़ी और मंदिर की स्थिति देखता हूं, तो खुद को ठगा सा महसूस करता हूं. दरकती पहाड़ी और उस पर स्थित भोले बाबा के मंदिर की जर्जर हालत बार-बार यह संकेत दे रहे हैं कि इस धार्मिक स्थल से अब और छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए. साथ ही इस पर अतिरिक्त बोझ भी न डाला जाये. पहाड़ी से हजारों लोगों की आस्था जुड़ी है. बेहतर होगा कि बाबा के मंदिर को मंदिर ही रहने दिया जाये.
इसे बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है. पहाड़ी पर लगे फ्लैग पोस्ट से जब भी तेज हवा के झोंके टकराते हैं, तो अनहोनी का खतरा उत्पन्न होता जाता है. ऐसे में इसे यहां से हटाकर किसी सुरक्षित जगह पर स्थापित किया जाये. मेरी राय में पहाड़ी पर कंक्रीट के ढांचों का निर्माण नहीं होना चाहिए. पहाड़ी पर मिट्टी का कटाव हो रहा है और पेड़ गिर रहे हैं. इसे रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगा कर यहां की हरियाली बढ़ायी जानी चाहिए.
पहाड़ी से संबंधित सारे दस्तावेज का डिजीटाइलेजशन हो, उसे उपायुक्त अपने अधीन रखें, ताकि दस्तावेज सुरक्षित रहे. खर्च का सारा ब्योरा को सार्वजनिक किया जाये. पहाड़ी मंदिर विकास समिति में कोषाध्यक्ष किसी सरकारी सेवा में कार्यरत किसी व्यक्ति को बनाया जाये. बाबा के मुख्य मंदिर के पास वाले हॉल को किसके आदेश से तोड़ दिया गया इसका खुलासा होना चाहिए.
