रांची : राज्यसभा सदस्य व प्रसिद्ध नृत्यांगना पद्म विभूषण सोनल मानसिंह ने कहा : भारतीयों को खुद पर गर्व करने का अधिकार है. लेकिन, उसके पहले हमें गर्व करने लायक बनना होगा. गर्व करने का अधिकारी बनना एक सतत प्रक्रिया है. यह भारतीयों को याद रखने का जरूरत है. खेलगांव में आयोजित लोकमंथन में भारत की दृष्टि में विश्व विषय पर अपने विचार रखते हुए श्रीमती मानसिंह ने कहा : भारत ने पूरे विश्व को अपने परिवार के नजरिये से देखा है. वसुदैव कुटुंबकम हमारा मूलमंत्र है. हम पूरे विश्व से अच्छे विचार लेकर अपने आचरण में उतारते रहे हैं.
उन्होंने कहा कि स्त्री जाति के लिए भारतीय संस्कृति ने जो सम्मान दिया है, वह दुनिया की किसी दूसरी संस्कृति या धर्म ने नहीं दिया. अमेरिका, अर्जेंटीना व आॅस्ट्रेलिया जैसे देशों ने जनजाति समाज की सभ्यता, संस्कृति का सफाया कर दिया है. लेकिन, उसके ठीक उलट भारत में जनजातियों को, आदिवासियों को हम बहुत सम्मान देते हैं. दरअसल, भारत के दर्शन में ही आनंद है. श्रीमती मानसिंह ने कहा : जापान रोबोटिक हो रहा है. उसे देख कर हमारे समाज में भी रोबोटिक होने की जरूरत महसूस की जा रही है.
पर सच्चाई है कि जापान में बच्चे नहीं हो रहे. उनकी जनसंख्या नहीं बढ़ रही है. इसी वजह से उनको रोबोट की जरूरत है. हमारे भारत में ऐसा कुछ नहीं है. हमें रोबोट नहीं, मानव बनने की जरूरत है. गूगल को आचार्य न समझें. फेसबुक और ट्विटर पर लिखने वालों को विद्वान मानना भूल होगी. हमें बेहतर बनने के लिए अपने आप में कमजोरी खोज कर उसे खत्म करना होगा.
दुर्भाग्य से देश में राष्ट्रगान जैसे सम्मानित कार्य के लिए भी असमानता बढ़ रही है. इसे खत्म करना होगा. इस अवसर पर भाजपा के पॉलिसी रिसर्च डिपार्टमेंट के सदस्य और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक अर्निबाण गांगुली ने भी विषय पर अपने विचार रखे.
