रांची : हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में मंगलवार को हजारीबाग सदर थाना क्षेत्र के विकास कुमार के अपहरण मामले में आरोपी की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने सुनवाई करते हुए मामले के अनुसंधानकर्ता की लापरवाही को गंभीरता से लिया. कड़ी नाराजगी जताते हुए डीजीपी को उपस्थित होने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि अपहृत विकास कुमार को चार्जशीट विटनेस क्यों नहीं बनाया गया. अदालत ने मामले की जांच पर ही सवाल उठाया.
इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार ने अदालत को बताया कि आरोपी 2 फरवरी 2013 से जेल में है. कस्टडी को देखते हुए जमानत की सुविधा प्रदान करने का आग्रह किया. उन्होंने अदालत को बताया कि अपहृत के 164 के बयान में आरोपी का नाम नहीं है. इसके बावजूद अनुसंधानकर्ता ने चार्जशीट में उनका नाम शामिल कर लिया. उनके खिलाफ कोई साक्ष्य भी नहीं है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी लक्ष्मण सिंह ने जमानत याचिका दायर की है. हजारीबाग सदर थाना कांड संख्या 75/ 2013 मामले में आरोपी हैं.
सदर थाना क्षेत्र के 12 वर्षीय नाबालिग छात्र विकास कुमार का अपहरण जनवरी 2013 में हुआ था. बाद में पुलिस ने उसे बरामद कर लिया. दो फरवरी 2013 को प्रार्थी लक्ष्मण सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. पुलिस ने राजकुमार, रोहित कुमार, लक्ष्मण सिंह सहित 11 के खिलाफ चार्जशीट दायर किया है, जिसमें अपहृत विकास कुमार को चार्जशीट विटनेस नहीं बनाया गया है.
