नयी दिल्ली : झारखंड के 20 समाजसेवियों, लेखकों और बुद्धिजीवियों के नक्सलियों से कथित संबंध रखने के मामले में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किये जाने के खिलाफ विभिन्न सामाजिक संगठनों ने रविवार को दिल्ली में मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने सरकार की इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार देते हुए कहा कि सरकार जनभावनाओं को दबाने के लिए दमनकारी नीति अपना रही है.
कार्यक्रम के संयोजक एलिना ने कहा कि आदिवासी हितों के लिए काम करने वाले फादर स्टेन स्वामी, विनोद कुमार, आलोक कुजूर, राकेश किडो जैसे लोगों पर बिना आधार के देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर दिया गया. सरकार पहले भोले-भाले आदिवासियों को नक्सलियों का समर्थक बता कर शोषण करती रही है.
अब उनके हितों की बात करने वाले लोगों को ही प्रताड़ित किया जा रहा है. सरकार के इस प्रयास से साफ जाहिर होता है कि विकास के नाम पर वो आदिवासियों की जमीन उद्योगपतियों को दे रही है. प्रदर्शनकारियों ने देशद्रोह का मुकदमा वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि जब तक सरकार मुकदमा वापस नहीं लेती है, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी.
