रांची : कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग की ओर से शनिवार को ऑड्रे हाउस में आयोजित सनिपरब में अमरनाथ कुमार व उनके दल ने नाटक कथन शालवन के अंतिम शाल का मंचन किया गया. इस नाटक के माध्यम से युवा कलाकारों ने शालवन के बचे हुए अंतिम शाल वृक्ष के दर्द को दर्शाया. यह दिखाया गया कि किस तरह औद्योगिकीकरण और विकास की होड़ में लोग पर्यावरण के महत्व की अनदेखी कर रहे हैं.
डॉ रामदयाल मुंडा की कविता के इस नाट्य रूपांतरण का निर्देशन सिकंदर ठाकुर ने किया. इस नाटक की प्रस्तुति में अनुराग लुगुन, अशोक कुमार, पुरुषोत्तम कुमार, सिकंदर ठाकुर, मुकेश राम प्रजापति व अमरनाथ कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत राजेश बड़ाइक व उनके दल के नागपुरी नृत्य से हुआ. इसके तहत जनानी झूमर और अंगनई नृत्य की प्रस्तुति भी हुई. इसके बाद नमिता सिन्हा व उनके दल ने शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी. वहीं, माधवी कुमारी के हिंदी गायन ने भी समां बांधा.
