रांची : पेयजल स्वच्छता विभाग के मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने कहा है कि शहरी क्षेत्रों में सामान्य दिनों में जरूरत के हिसाब से पानी उपलब्ध कराया जाता है. इसके बाद भी हंगामा होता है. शहर के लोग गांव के लोगों के मुकाबले ज्यादा पानी बर्बाद करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता कम है, इस कारण वहां लोग संयमित होकर पानी खर्च करते हैं.
श्री चौधरी मंगलवार को कांके स्थित विश्वा सभागार में स्वजल स्कीम के 15 सितंबर तक चलनेवाले मास्टर ट्रेनरों के ट्रेनिंग समारोह में बोल रहे थे. श्री चौधरी ने कहा कि पानी का प्रबंधन सबसे जरूरी है. आज भी हमारे गांव बुनियादी सुविधाओं से काफी दूर हैं. लोग भी सरकार पर पूरी तरह निर्भर होना चाहते हैं. लोगों को भी अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए.
स्कीम में डुप्लीकेसी हुई, तो ऊपर से नीचे तक अफसर होंगे निलंबित
पेयजल स्वच्छता विभाग की सचिव अराधना पटनायक ने कहा कि सरकारी स्तर पर पेयजल की कई स्कीम चल रही है. इसमें डुप्लीकेसी की संभावना है. इस पर अधिकारियों को नजर रखना होगा. डुप्लीकेसी की एक भी शिकायत मिली, तो कार्यपालक अभियंता से लेकर नीचे तक के अफसरों पर कार्रवाई होगी. श्रीमती पटनायक ने कहा कि दो अक्तूबर को पूरे राज्य को ओडीएफ घोषित करना है. अभी करीब तीन लाख शौचालय बनाना है.
यह सर्वे वाला डाटा है. इसके बावजूद भी कुछ लोग छूट जायेंगे, उनकी डिमांड आते ही शौचालय बना दिया जायेगा. जहां-जहां शौचालय बना है, वहां पानी की कमी बतायी गयी है. वहां पानी की कमी दूर करना प्राथमिकता है. मौके पर यूनिसेफ की प्रमुख मधुलिका जोनाथन, भारत सरकार के प्रतिनिधि मुरलीधर ने भी विचार रखे. संचालन यूनिसेफ के प्रेमचंद ने किया.
19 अाकांक्षी जिलों में चलेगा स्कीम
विभाग के मुख्य अभियंता श्वेताभ कुमार ने बताया कि स्वजल स्कीम राज्य के 19 अाकांक्षी जिलों में चलाया जाना है. इसके लिए 10-10 पंचायत को चुना गया है. यह स्कीम जनभागीदारी से संचालित होना है. गांव के लोग जहां चाहेंगे, वहां उनको पानी की सुविधा दी जायेगी. स्कीम के संचालन में टाटा ट्रस्ट और यूनिसेफ सहयोग कर रहा है.
