रांची : ऑपरेशन नयी दिशा के तहत सरेंडर करनेवाले 170 नक्सलियों व उग्रवािदयों को बड़ी राहत मिल सकती है. सभी नक्सलियों पर दर्ज मामलों को वापस लिया जा सकता है. साथ ही उन्हें आत्मसमर्पण नीति के तहत मिलनेवाली सुविधाएं प्रदान की जायेगी.
इसके लिए जिलास्तर पर कमेटी बना कर मामलों का निबटारा किया जायेगा. इस संबंध में विभाग की ओर से जिलों को निर्देश जारी किया गया है. अनुशंसा कमेटी सरेंडर कर चुके नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा करेगी. इसके बाद दर्ज मामले वापस लेने की अनुशंसा सरकार से करेगी. फिर सरकार के स्तर पर निर्णय लेने के बाद केस वापसी के लिए कोर्ट से प्रे किया जायेगा.
अब जिला स्तर पर निर्णय : सरेंडर करनेवाले नक्सलियों को आत्मसमर्पण नीति के तहत क्या सुविधाएं मिली हैं, इसकी समीक्षा जिलास्तर पर पुनर्वास कमेटी को करनी है. अगर किसी नक्सली को पैसा, जमीन, बीमा, बच्चों की पढ़ाई का खर्च नहीं मिला होगा, तो उसे वह सुविधा दिलायी जायेगी.
यह कमेटी सरेंडर करनेवाले नक्सलियों व उसके परिवार की सुरक्षा पर भी ध्यान देगी. इस कमेटी को हर माह सरेंडर करनेवाले नक्सलियों के साथ बैठक भी करनी होगी, ताकि यह पता चल सके कि उन्हें कोई परेशानी तो नहीं है. सरकार का मकसद यह है कि मैसेज वैसे नक्सलियों को भी जाये, जो मुख्यधारा से दूर हैं.
वे मुख्यधारा में वापस लौटें. पूर्व में आत्मसमर्पण नीति के तहत मिलनेवाली सुविधाओं के लिए जिला कमेटी को गृह विभाग को अनुशंसा भेजनी पड़ती थी, लेकिन इसे अब समाप्त कर दिया गया है. अब यह निर्णय जिलास्तरीय कमेटी खुद से लेगी.
जेल से बाहर रखने की नहीं हो सकी व्यवस्था : झारखंड में सरेंडर करनेवाले नक्सलियों को जेल जाना पड़ता है, लेकिन पश्चिम बंगाल, ओड़िशा व तेलंगाना में सरेंडर के बाद पुलिस लाइन अथवा किसी अन्य सुरक्षित जगह पर रखा जाता है. इसको देखते हुए झारखंड में भी उच्चस्तर पर हुई बैठक में कई अफसरों ने यह मांग रखी थी कि सरेंडर करनेवाले नक्सलियों को जेल भेजने की जगह उन्हें अलग रखने की व्यवस्था की जाये, लेकिन इस पर आम सहमति नहीं बनी.
हालांकि सरेंडर करनेवाले नक्सलियों पर आइपीसी, सीआरपीसी व नक्सल एक्ट अादि की धाराएं लगी रहती है, जिसमें अपराधियों के पकड़े जाने पर उन्हें जेल भेजे जाने का प्रावधान है. झारखंड की आत्मसमर्पण नीति में भी सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जेल की जगह दूसरे सुरक्षित जगह पर रखने का प्रावधान नहीं किया गया है.
अंतिम निर्णय कोर्ट के जिम्मे
नक्सलियों पर दर्ज केस को वापस करने के संबंध में सरकार कोर्ट से अाग्रह करेगी. कोर्ट इस पर क्या निर्णय लेती है, इस पर निर्भर करेगा कि केस वापस होगा अथवा नहीं.
