वामदलों सहित सामाजिक संगठनों से निकाला प्रतिवाद मार्च
रांची : वामदलों सहित सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने रांची विवि के मुख्य गेट से अलबर्ट एक्का चौक तक नागरिक मार्च कर मानव श्रृंखला बनायी. यह भीमा कोरेगांव की घटना के खिलाफ एक नागरिक प्रतिवाद था. मार्च में शामिल लोगों के हाथों में नारे व कविता लिखी तख्तियां थी.
वक्ताअों ने कहा कि देश-झारखंड के मशहूर सामाजिक, मानवाधिकार व बौद्धिक कार्यकर्ताअों पर दमन लोकतंत्र के लिए घातक साबित होगा. असहमति लोकतंत्र की सुरक्षा कवच है. उन्होंने कहा कि भीमा कोरेगांव की घटना कोई षड्यंत्रकारी घटना नहीं थी, बल्कि यह केंद्र सरकार के गलत फैसले के खिलाफ जन विरोध था.
इसे प्रधानमंत्री के खिलाफ षड्यंत्र मानना गलत है. प्रतिवाद कार्यक्रम में फिल्मकार मेघनाथ, बीजू टोप्पो व श्री प्रकाश, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, साहित्यकार महादेव टोप्पो, वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवास व विनोद कुमार, डॉ बब्बन चौबे, प्रेमचंद मुर्मू, दयामनि बारला, बशीर अहमद, अजयनाथ शाहदेव, आज़म अहमद,नदीम खान, शुवेन्दु सेन,जगरनाथ उरांव, अफजल अनीश, समीर दास, वरुण कुमार, भारत भूषण, अलोका कुजूर, जेरोम जोराल्ड कुजूर, फादर महेंद्र, सुनील मिंज,अजय कुंडुला, सेराज दत्ता,अंकित अग्रवाल,आकाश रंजन,सुशीला टोप्पो, दीपा मिंज, नरेश मुर्मू, राकेश रोशन, स्टीफन लकड़ा, रूपेश साहू,भाकपा माले के भुनेश्वर केवट, धिवक्ता सच्चिदानंद मिश्रा, एसयूसीआइ के मंटू पासवान, मासस के सुशांतो मुखर्जी, आम आदमी पार्टी के राजेश कुमार,जेवीएम के अकबर कुरैशी व साजिद उमर शामिल थे.
स्टेन स्वामी से मिले बाबूलाल
रांची : सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी से झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुलाकात की़ पिछले दिनों स्टेन स्वामी के घर और ऑफिस में पुणे पुलिस ने सर्च अभियान चलाया था़ श्री मरांडी ने इस बाबत स्टेन स्वामी से जानकारी ली़ साथ ही पुलिसिया कार्रवाई पर आपत्ति जतायी है़ वहीं सामाजिक और राजनीतिक संगठनों द्वारा सामूहिक विरोध प्रदर्शन को लेकर चर्चा हुई़
रांची़ : गिरफ्तार लोगों को शीघ्र रिहा करे सरकार
रांची़ : झारखंड के बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने फादर स्टेन स्वामी सहित अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के यहां हुई छापेमारी की निंदा की है. झारखंड नागरिक समाज के बैनर तले लोगों ने कहा है कि वे देश के विभिन्न प्रांतों में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों (जो सरकार एवं सत्ताधारी दल की आलोचना करते रहे हैं) के घरों पर पुलिस के छापों से हतप्रभ एवं आहत हैं.
सुधा भारद्वाज, वेरनन गोंसाल्विस, गौतम नवलखा, वरावर राव, अरुण परेरा एवं अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से सरकार उन लोगों को आतंकित करने का प्रयास कर रही है, जो वंचितों के न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं एवं जो उनकी आवाज हैं. गिरफ्तार लोगों को तुरंत रिहा करने व झूठे व मनगढ़ंत आरोप को वापस लेने की मांग की.
ज्यां द्रेज, फैसल अनुराग, जेम्स हेरेंज, कल्याणी मीना, किसलय, कुमार संजय, प्रेम वर्मा, दीपक बाड़ा, जवाहर मेहता, इशान बनर्जी आदि ने कहा कि स्टेन स्वामी के आवास पर पुलिस का छापा आपत्तिजनक है. स्टेन लगातार राज्य के आदिवासियों एवं मूलवासियों के हक में आवाज उठाते रहे हैं. उन्होंने विस्थापन, कॉरपोरेट द्वारा संसाधनों की लूट और विचाराधीन कैदियों की स्थिति पर शोधपरक काम किया है. उन्होंने सीएनटी-एसपीटी कानून में किये गये संशोधन का विरोध किया है.
कुछ दिनों पहले स्टेन व झारखंड के अन्य 19 व्यक्तियों (इनमें सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार एवं बुद्धिजीवी शामिल हैं) पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया था. खूंटी में चल रहे पत्थलगड़ी आंदोलन पर उनके द्वारा किये गये फेसबुक पोस्ट को आरोप का आधार बनाया गया था.
उन पर आइटी एक्ट की धारा 66अ भी लगायी गयी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में ही निरस्त कर दिया था. छापे एवं गिरफ्तारी से सरकार लोकतांत्रिक ढंग से उठाये जा रहे विरोध की आवाज को दबाने एवं इन लोगों को डराने का प्रयास कर रही है.
