रांची : भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून के खिलाफ व आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की मांग को लेकर आदिवासी सरना महासभा, राजी पड़हा झारखंड, 22 पड़हा मुंडा दिशुम, मुंडा मानकी संघ, मांझी परगना महाल सहित विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों ने राजभवन के समक्ष धरना दिया.
आदिवासी सरना महासभा के संयोजक व पूर्व मंत्री देवकुमार धान ने कहा कि झारखंड की वर्तमान सरकार आदिवासी विरोधी है़ चंद उद्योगपतियों व पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए यहां के आदिवासी व मूलवासियों की जमीन छीन रही है़ इसके लिए सीएनटी-एसटीपी कानून में संशोधन कर इसे प्रभावहीन बनाने की लगातार कोशिश की जा रही है़
श्री धान ने कहा कि लैंड बैंक के नाम पर 20 लाख एकड़ से भी ज्यादा गैर मजरुआ जमीन को कब्जे में लेकर उद्योगपतियों को निमंत्रण दिया जा रहा है, जबकि आदिवासियों की प्राचीन परंपरा और सीएनटी-एसपीटी कानून के अनुसार गैर मजरुआ जमीन पर पहला हक गांव का होता है़ खेती की जमीन की जमाबंदी रद्द कर दी गयी है़
सरकार की इन आदिवासी विरोधी नीतियों से लोगों को अवगत कराने के लिए हर गांव, पंचायत, प्रखंड व जिला स्तर पर जन जागरण अभियान चलाया जायेगा़ साथ ही हर स्तर पर इसका विरोध भी किया जायेगा़ इस अवसर पर सघनु भगत, नारायण उरांव, सुखदेव उरांव, वीणा कुजूर, मुन्नी पाहन, छेदी मुंडा, रामनाथ उरांव, अमित गाड़ी, रजनीश उरांव, वामेश्वर उरांव, गुड़वा हेरेंज, रामा भगत, रमेश उरांव, प्रेमनाथ मुंडा, दुर्गावती ओड़ेया, नीमा उरांव, रायमुनी उरांव, मुन्नी उरांव, भुवनेश्वर सिंह चेरो सहित कई लोग मौजूद थे़
