रांची : सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र विनय महतो हत्याकांड में पुलिस ने अनुसंधान के दौरान कई बिंदुओं पर लापरवाही बरती थी. पुलिस ने सिर्फ परिस्थिति जनक साक्ष्य के आधार पर ही नाजिया हुसैन, उसके पति और दो नाबालिग बच्चों को दोषी मान लिया था.
दो साल से अधिक अनुसंधान के बीत जाने के बावजूद पुलिस इस केस में आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पायी थी, जिस कारण छह जुलाई को न्यायालय ने दो नाबालिग आरोपियों को बरी कर दिया था. विनय महतो की हत्या पांच फरवरी 2016 की रात की गयी थी. इस केस में सुपरविजन रिपोर्ट तीन मार्च 2016 हटिया एएसपी ने जारी की थी. उन्होंने अपने निर्देश में घटनास्थल से बरामद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को जांच के लिए एफएसएल चंडीगढ़ भेजने का निर्देश केस के अनुसंधानक को दिया था.
लेकिन इस केस में डिवाइस को बाद में जांच के लिए कोलकाता एफएसएल के पास भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट पुलिस हासिल भी नहीं कर पायी. ट्रायल के दौरान न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की कई गलतियों को उजागर भी किया है. इसके संबंध में केस में लिये गये निर्णय में विस्तार से उल्लेख भी किया गया है.
इन बिंदुओं पर बरती थी लापरवाही :
पुलिस ने केस में अनुसंधान के दौरान दो साल बीत जाने के बावजूद न्यायालय में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने का प्रयास नहीं किया, कोलकाता से एफएसएल की रिपोर्ट पुलिस न्यायालय में समर्पित नहीं कर पायी थी व पुलिस ने अपने पूरे अनुसंधान और केस डायरी में एफएसल की रिपोर्ट के बारे में उल्लेख नहीं किया.
