रांची : भारत सरकार का कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय झारखंड में खरीफ की खेती को उन्नत बनाने और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रहा है. कृषि मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र झारखंड में खरीफ चावल क्षेत्र की मैपिंग कर रहा है. इसके लिए इसरो द्वारा विकसित कार्यप्रणाली प्रयोग में लायी जा रही है. राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार द्वारा गुरुवार को राज्यसभा में पूछे गये एक प्रश्न के जवाब में राज्यमंत्री डॉ जीतेंद्र सिंह ने यह जानकारी दी.
मंत्री ने बताया कि मैपिंग का लाभ उठाकर किसान खरीफ के बाद परती भूमि पर अतिरिक्त फसल हासिल कर सकते हैं. प्राथमिक विश्लेषण बताता है कि खरीफ मौसम के बाद खरीफ चावल क्षेत्र की करीब 65-70 प्रतिशत भूमि परती छोड़ दी जाती है. यह इलाके मुख्य रूप से राज्य के दक्षिणी जिलों में स्थित हैं.
खरीफ मौसम के बाद परती छोड़ दी जानेवाली भूमि का करीब 25-30 प्रतिशत हिस्सा खरीफ के बाद की ऋतु के दौरान छोटी अवधि वाले दलहन की फसल के लिए उपयुक्त पाये गये हैं. यह इलाके रांची, गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, गिरिडीह, कोडरमा आदि जिलों में स्थित हैं.
