रांची : मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंची निगम की लड़ाई

रांची : रांची नगर निगम में मेयर आशा लकड़ा और पार्षदों के बीच उभरा विवाद बुधवार को मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंच गया. मेयर की शिकायत लेकर 13 पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचा. पर विलंब से पहुंचने के कारण मुख्यमंत्री से पार्षदों की मुलाकात नहीं हो सकी. पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल […]

रांची : रांची नगर निगम में मेयर आशा लकड़ा और पार्षदों के बीच उभरा विवाद बुधवार को मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंच गया. मेयर की शिकायत लेकर 13 पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचा. पर विलंब से पहुंचने के कारण मुख्यमंत्री से पार्षदों की मुलाकात नहीं हो सकी. पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल अब गुरुवार को मुख्यमंत्री से मिलेगा.
यहां पार्षदों ने आरोप लगाया कि एक तो मेयर झारखंड नगरपालिका अधिनियम के तहत काम नहीं कर रही हैं, दूसरे पार्षदों को लगातार अपमानित कर रही हैं. पार्षदों ने कहा कि 18 जुलाई को 43 पार्षदों ने लिखित देकर मेयर से विशेष बोर्ड की बैठक बुलाने की मांग की थी. लेकिन, मेयर ने अब तक बैठक नहीं बुलायी, जो सीधे-सीधे नगरपालिका अधिनियम का उल्लंघन है. गौरतलब है कि मेयर के निर्णय के विरोध में पार्षदों ने नगर निगम के समक्ष धरना-प्रदर्शन और तालाबंदी की चेतावनी दी थी. इस पर मेयर ने इन पार्षदों को नोटिस भी जारी किया था.
निलंबित करने का पावर भी मेयर के पास : आशा
इधर, मेयर आशा लकड़ा ने शाम में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जो भी एजेंडा झारखंड नगरपालिका अधिनियम के विरुद्ध लगेगा, उसके लिए स्पष्टीकरण मांगा जायेगा.
क्योंकि, निगम बोर्ड के अध्यक्ष होने के कारण उन्हें यह अधिकार नगरपालिका अधिनियम से ही मिला हुआ है. जरूरत पड़ी, तो निलंबन करने का अधिकार भी मेयर को दिया गया है. मेयर होने के नाते बोर्ड की बैठक चलाने का विशेष अधिकार मेयर को मिला हुआ है. इसलिए विरोध करना सही नहीं है. मेयर पद की एक गरिमा है. इसको बचाने की जिम्मेदारी सभी पार्षदों की है.

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