हरित कौशल विकास कार्यक्रम के तहत लाह व तसर की खेती पर आठ सप्ताह का प्रशिक्षण शुरू
पिस्कानगड़ी : भारत की युवा जनशक्ति को वैश्विक चुनौतियों से निबटने के लिए कौशल और क्षमता प्रदान करने की जरूरत है. जितना अधिक हम कौशल विकास को महत्व देंगे, उतना अधिक युवा सक्षम होंगे. भविष्य की संभावनाओं की भविष्यवाणी करना और उसकी तैयारी आज ही महत्वपूर्ण है. उक्त बातें वन उत्पादकता संस्थान के निदेशक डॉ नितिन कुलकर्णी ने हरित कौशल विकास कार्यक्रम के तहत लाह व तसर की खेती पर आठ सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कही.
उन्होंने कहा कि दो महीने के प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को लाख पोषक पौध, पोषक पौध का पौधशाला, पोषक पौध का रख रखाव, लाख खेती करने की विधि (कटाई–छंटाई, लाख बीज की पहचान, लाख बीज का संचारण, दुश्मन कीटों की रोकथाम विधि, लाख उत्पाद तथा लाख बाजार आदि विषयों पर प्रशिक्षण दिया जायेगा. प्रशिक्षण में तसर की आधुनिक खेती करने के तरीके बताये जायेंगे. प्रशिक्षण पूरा करने वाले अभ्यर्थियों को चिड़ियाघर, वन्यजीव अभ्यारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों, जीवमंडल भंडार, वनस्पति उद्यान, नर्सरी, आर्द्र भूमि स्थलों, राज्य जैव विविधता बोर्ड, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो में लाभप्रद रूप से नियोजित किया जा सकता है. संस्थान के जनसंपर्क पदाधिकारी शंभुनाथमिश्रा ने बताया के प्रशिक्षण में विभिन्न राज्यों झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, एवं ओड़िशा से प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं.
संस्थान द्वारा 17 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया है. इस अवसर पर संस्थान के समूह समन्वयक डाॅ शरद तिवारी, पाठ्यक्रम निदेशक डाॅ संजय सिंह, वैज्ञानिक, भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान, नामकुम के डाॅ निर्मल कुमार, एके सिन्हा व तसर अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डाॅ जीपी सिंह व अन्य उपस्थित थे.
