रांची : जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर राज्य में आंदोलन तेज हो गया है. राजधानी के मोराहाबादी स्थित आनंद मंगल बैंक्वेट हॉल एदलहातु में नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के विद्वानों ने आंदोलन को तेज करने के लिए बैठक की. जिसमें सभी नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषों में पढ़ाई प्रारंभ करने की मांग की गयी.
कार्यक्रम में मौजूद साहित्यकार, कलाकार, भाषाकर्मी, शोधार्थी, छात्र-छात्राओं ने झारखंडी भाषाओं की उपेक्षा पर आवाज बुलंद की. पद्मश्री मुकुंद नायक ने गीत के माध्यम से झारखंड की वर्तमान दशा और दिशा को बताया. उन्होंने भाषाई अभियान को आगे बढ़ाने की बात कही.
झारखण्ड में भाषा आंदोलन को खडा करने के लिए एक साझा संगठन ‘झारखंडी भाषा परिषद’ का गठन किया गया. भाषा परिषद ने राज्य के सभी निजी एवं सरकारी स्कूल-कॉलेजों में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई और उसके लिए अलग विभाग शुरू करने की मांग की. इसके साथ ही जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा में प्राध्यापक, सह प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक का पद सृजन कर अविलंब नियुक्ति की मांग की गयी.
नागपुरी साहित्यकार डॉ रामप्रसाद ने झारखंड बनने के बाद झारखंडी भाषाओं पर हो रहे हमले और षड्यंत्र पर दुख जताया. कमलेश राम ने झारखंडी भाषा आंदोलन को अपना पूरा सहयोग देने की बात कही. उन्होंने कहा कि भाषा आंदोलन ही झारखंड और झारखंडियों को सम्मान दे सकता है.बैठक में पद्मश्री मुकुंद नायक, डॉ गिरीधारी राम गौंझू , गायक गीतकार मधु मंसूरी हंसमुख, डॉ शांति खलखो और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे.
