दो बार सिपाही को किया बहाल, अब बर्खास्त
रांची : विभागीय शर्तों को पूरा करने के बाद राज चौधरी को चार फरवरी 1993 को सिपाही आदेशपाल के पद पर नियुक्त किया गया था. इसके बाद रेल डीआइजी कार्यालय, रांची में पदस्थापना किया गया था. पुलिस मुख्यालय ने अवैध नियुक्ति की बात कहते हुए सेवा के नौ साल बाद 26 फरवरी 2002 को राज चौधरी को बर्खास्त कर दिया. इस आदेश के खिलाफ वे हाइकोर्ट गये. वहां पर न्यायालय का आदेश इनके पक्ष में आया. कोर्ट ने महकमा को निर्देश दिया कि इनको पूर्व के पद पर बहाल किया जाये. इस अादेश के बाद गृह विभाग ने मामले को लेकर 28 फरवरी 2009 को बैठक की. वहीं चौधरी की पुनर्नियुक्ति किये जाने को लेकर आदेश पारित किया. जिसमें पुलिस मुख्यालय को निर्देश दिया गया कि चौधरी की सेवा में योगदान की तिथि से पुनर्नियुक्ति तक अनुमान्य वेतन वृद्धि और वेतन पुनरीक्षण का लाभ देय होगा. साथ ही उनकी सेवा में टूट नहीं मानी जायेगी.
तथ्य छिपाने का आरोप लगा कर अंितम बार 2017 में गृह विभाग ने हटाया
गृह विभाग के अादेश के बाद 13 अगस्त 2013 को राज चौधरी ने पुलिस मुख्यालय में डीजीपी के कार्यालय में योगदान दिया. फिर डीजीपी कार्यालय के आदेश के बाद चौधरी ने नौ अक्टूबर 2013 को रेल डीआइजी कार्यालय, रांची में योगदान दिया. अचानक चार साल बाद गृह विभाग ने 27 फरवरी 2017 को सीधे राज चौधरी से स्पष्टीकरण पूछा. जबकि नियम के तहत वे डीआइजी कार्यालय में पदस्थापित थे, तो उनसे डीआइजी के माध्यम से स्पष्टीकरण पूछना चाहिए था, जो कि नहीं किया गया. वहीं तथ्य छिपाने का आरोप लगाते हुए तीन नवंबर 2017 को फिर से गृह विभाग ने इन्हें बर्खास्त कर दिया. जबकि चौधरी के जैसे ही मामले में इन्हीं का केस नंबर डब्ल्यू (एस) नंबर 4356/2002 का हवाला देकर 12 अन्य पुलिसकर्मी अभी भी विभिन्न जिलों में काम कर रहे हैं. पूर्व में भी 2003 में गृह विभाग के ही आदेश पर जमशेदपुर में 36 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं. इस मामले में रांची के चुटिया गोसाई टोली निवासी सिपाही राज चौधरी ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर फिर से सेवा में बहाल करने का अनुरोध किया है. पत्र में चौधरी ने दावा किया है कि जिस ढंग से उन्हें बर्खास्त किया गया है, वह अनुचित है. उनकी सेवा बहाल नहीं होने की स्थिति में उनके या परिवार के साथ किसी तरह की घटना होने पर गृह विभाग जिम्मेदार होगा.
