निर्मल हृदय से बच्चा बेचे जाने की जांच CID ने शुरू की, मामले में दो को भेजा जा चुका है जेल

सीआइडी इंस्पेक्टर ने गुरुवार को कोतवाली पुलिस से लिया केस का चार्ज सीआइडी एडीजी ने 20 जुलाई को दिया था केस ट्रांसफर का आदेश रांची : मिशनरजी ऑफ चैरिटी की ओर से संचालित निर्मल हृदय द्वारा अवैध तरीके से बच्चा बेचने से संबंधित मामले की जांच गुरुवार को सीआइडी ने शुरू कर दी. इस मामले […]

सीआइडी इंस्पेक्टर ने गुरुवार को कोतवाली पुलिस से लिया केस का चार्ज
सीआइडी एडीजी ने 20 जुलाई को दिया था केस ट्रांसफर का आदेश
रांची : मिशनरजी ऑफ चैरिटी की ओर से संचालित निर्मल हृदय द्वारा अवैध तरीके से बच्चा बेचने से संबंधित मामले की जांच गुरुवार को सीआइडी ने शुरू कर दी. इस मामले में तीन जुलाई को एएचटीयू थाना में मामला दर्ज हुआ था. इसका अनुसंधान दारोगा नीलम भेंगरा कर रही थी.
सीआइडी रांची टीम के इंस्पेक्टर मो निहालउद्दीन ने गुरुवार को कोतवाली थाना पहुंच कर श्रीमती भेंगरा से केस का चार्ज लिया. केस के सभी पेपर जांच के लिए प्राप्त कर लिये गये.
केस का अनुसंधान सीआइडी इंस्पेक्टर को लेने से संबंधित आदेश सीआइडी एडीजी प्रशांत कुमार सिंह ने 20 जुलाई को जारी किया था. उल्लेखनीय है कि इस केस में पूर्व में पुलिस संस्था की सिस्टर कोंसीलिया और अनिमा इंदवार को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. गिरफ्तारी के बाद अनीमा इंदवार ने चार बच्चों को सिस्टर के सहयोग से बेचने की जानकारी दी थी.
जब उसे रिमांड पर लाया गया था, तब दोबारा पूछताछ के दौरान अनीमा ने तीन और बच्चों को बेचने की जानकारी पुलिस को दी थी. उसने यह भी बताया था कि एक बच्चा को बेचने में उसे सदर अस्पताल की गार्ड रेणु पांडेय ने सहयोग किया था. इसके अलावा पूर्व में सदर अस्पताल की दो महिला गार्ड का नाम बच्चा बेचने में सहयोग करने के रूम में सामने आ चुका है.
अब सीआइडी अनुसंधान के दौरान बेचे गये तीन अन्य बच्चों को बरामद करने का प्रयास करेगी. केस का चार्ज देने के दौरान तीन अन्य बच्चों को बरामद करने का अनुरोध भी पुलिस ने सीआइडी के इंस्पेक्टर से किया है.
सीआइडी के अधिकारी केस के अनुसंधान के दौरान जेल जाकर या दोबारा रिमांड पर लेकर सिस्टर कोंसीलिया और अनिमा इंदवार से पूछताछ कर सकते हैं. सीआइडी के अधिकारी अनुसंधान के दौरान यह भी पता करेंगे कि बच्चों को बेचने में और किसी की संलिप्तता तो नहीं थी. संस्थान से कुल कितने बच्चे गायब हैं व जिनके बच्चे बेचे गये, उन महिलाओं का बयान भी लिया जायेगा. इसके अलावा पूरे मामले में संस्था की किसी अन्य कर्मी की संलिप्तता तो नहीं थी. इस बिंदु पर भी जांच की जायेगी.
सीडब्ल्यूसी को सशक्त करने की जरूरत : प्रधान न्यायाधीश
रांची : बच्चों के संरक्षण अौर देखभाल के लिए योजना फोस्टर केयर अौर स्पांसरशिप पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम गुरुवार को सिविल कोर्ट परिसर में संपन्न हुआ.
मुख्य अतिथि फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश बीके गौतम ने कहा कि फोस्टर केयर के लिए परिवारों का चयन करना चुनौतीपूर्ण काम है. इसे कर्मठता से करना होगा. साथ ही यह भी देखना होगा कि इस योजना का दुरुपयोग न हो. स्पांसरशिप व फोस्टर केयर की योजना प्रभावी रूप से लागू हो, इसके लिए सीडब्ल्यूसी और जिला बाल संरक्षण इकाई को सशक्त करना जरूरी है.
न्यायायुक्त प्रथम प्रदीप कुमार ने कहा कि प्रशिक्षणार्थी निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करें और अधिक से अधिक बच्चों तक इस योजना का लाभ पहुंचायें.
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी स्वयंभू ने दोनों योजनाअों के विभिन्न बिंदुअों पर प्रकाश डाला. इससे पूर्व चिल्ड्रेन कोर्ट के विशेष जज दिवाकर पांडे, एमिटी यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर भूमिका सच्चर ने भी प्रतिभागियों को जानकारी दी. संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव फहीम किरमानी ने किया. मौके पर रजिस्ट्रार अभिषेक प्रसाद सहित अन्य उपस्थित थे.

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