रांची : राज्य सरकार ने सात साल में 25.80 करोड़ के सीक्रेट सर्विस फंड (एसएस फंड) के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगे जाने के बाद भी एजी को नहीं दिया है. एजी एसएस फंड की ऑडिट नहीं करते. पर सरकार की कानूनी बाध्यता है कि वह समय पर एजी को एसएस फंड की उपयोगिता का प्रमाण पत्र दे.
सूचना एकत्र करने में होती है राशि का इस्तेमाल : राज्य सरकार हर साल पुलिस विभाग के लिए बजट में एसएस फंड का प्रावधान करती है. पुलिस विभाग इस राशि का इस्तेमाल कर विभिन्न प्रकार की सूचनाएं एकत्र करता है.
विभाग को गुप्त सूचना देनेवालों के नाम उजागर न हो, इसलिए एजी की ओर से इस राशि के खर्च की ऑडिट नहीं करने का प्रावधान है. पर गुप्त सेवा के नाम पर किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी को रोकने के लिए विभागीय ऑडिट का प्रावधान किया गया है. इसकी विभागीय ऑडिट मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की ओर से की जाती है.
गृह सचिव इस समिति के सदस्य होते हैं. ऑडिट करने के बाद समिति प्रमाण पत्र जारी करती है. इसमें उल्लेख किया जाता है कि फंड का सही उपयोग किया गया. इसी प्रमाण पत्र को एजी के पास भेजा जाता है.
एजी नहीं करते एसएस फंड की ऑडिट
एजी को उपयोगिता प्रमाण पत्र देने की है कानूनी बाध्यता
31 अगस्त से पहले तक प्रमाण पत्र देना है
नियमानुसार, किसी वित्तीय वर्ष में एसएस फंड मद में किये गये प्रावधान के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र दूसरे वित्तीय वर्ष में 31 अगस्त से पहले तक देने है.
पर राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2005-06 में एसएस फंड के रूप में खर्च किये गये 8.30 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र अब तक एजी को नहीं दिया है. सरकार ने वित्तीय वर्ष 2007-2008, 2008-2009, 2012-13, 2013-14, 2014-15 व 2015-16 में एसएस फंड के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र अब तक एजी को नहीं दिया है.
एसएस फंड का ब्योरा (राशि करोड़ में)
वित्तीय वर्ष पदाधिकारी राशि
2005-06 डीजीपी 8.30
2007-08 एडीजी स्पेशल ब्रांच 4.50
2008-09 एडीजी स्पेशल ब्रांच 2.50
2012-13 एडीजी स्पेशल ब्रांच 2.50
2013-14 एडीजी स्पेशल ब्रांच 2.50
2014-15 एडीजी स्पेशल ब्रांच 2.50
2015-16 एडीजी स्पेशल ब्रांच 3.00
