मनोज सिंह
गोदाम में बेकार पड़ी है लाखों रुपये की संपत्ति, एक नये कंटेनर की कीमत 50 से लेकर 80 हजार रुपये तक है
रांची : पशुपालन विभाग के होटवार स्थित गोदाम से 600 से अधिक कंटेनर गायब हो गये हैं. यह कंटेनर उपयोग करने के बाद गोदाम में रखे हुए थे. इसका उपयोग कृत्रिम गर्भाधान के लिए फ्रोजेन सिमेन रखने के लिए होता था.
जानकारी के मुताबिक वर्षों से यह गोदाम नहीं खोला गया है. 10 जुलाई को यहां 29 उपयोग किये कंटेनर रखने का आदेश विभागीय प्रमुख से मिला. जब पशुपालन विभाग के कर्मी गोदाम में कंटेनर रखने गये, तो देखा ताला बदला हुआ है. विभाग के ताले के स्थान पर दूसरा ताला लगा हुआ है. इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को दी गयी.
अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण करने के बाद खिड़की खोली. उन्होंने देखा कि गोदाम में एक भी कंटेनर नहीं है. स्टॉक रजिस्टर मिलान से पता चला कि यहां करीब 600 कंटेनर थे. गायब करनेवाले ने गोदाम का ताला खोलकर नया ताला लगा दिया है. केंटनर गायब होने की सूचना मिलने के बाद खेलगांव थाने को इसकी जानकारी दी गयी. वहां लिखित सनहा दिया गया है. इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों ने विभाग के निदेशक चितरंजन कुमार को भी दी है.
असुरक्षित हो गया कैंपस
पशुपालन विभाग के इस कार्यालय के बगल वाली जमीन पर (पूर्व में पशुपालन विभाग की जमीन थी) टेक्सटाइल पार्क का निर्माण कराया जा रहा है. इस कारण विभाग के कई कोने की चहारदीवारी टूट गयी है. पूर्व वाली जमीन पर पशुपालन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का कार्यालय था. उनको हटा दिया गया है. विभागीय अधिकारियों ने यह जमीन टेक्सटाइल पार्क को दिये जाने का शुरू में विरोध भी किया था.
55 लीटर का है एक कंटेनर
एक-एक कंटेनर मेटल से बना हुआ था. इसमें लिक्विड नाइट्रोजन रखा जाता था. एक कंटेनर करीब 55 लीटर का है. इस कारण इसका वजन भी ज्यादा है. एक आदमी को उठाने में परेशानी होती थी. विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इसे बिना दो-तीन ट्रक से चोरी करना संभव नहीं है. नये में एक कंटेनर की कीमत 80 हजार रुपये तक होती है. यह बैल के सिमेन को निगेटिव तापमान में सुरक्षित रखता है. कैंपस के भवन में कई नये कंटेनर भी लिक्विड नाइट्रोजन सहित रखे हुए हैं.
वहां के अधिकारियों ने सूचना दी है. बताया जा रहा है कि चोरी हो गयी. वहां के अधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है. वहां के अधिकारियों ने थाने को भी सूचना दी है. चितरंजन कुमार, निदेशक, पशुपालन
