नहीं ले रहे सबक. सरकारी विभागों की अदूरदर्शिता के कारण पानी में बह जा रहे जनता के पैसे
रांची : राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रही ऐसी निर्माण योजनाओं की लंबी फेहरिस्त है, जिन्हें बीच में ही तोड़ कर नये सिरे से निर्माण कार्य शुरू किया गया.
हालांकि, यहां बात केवल राजधानी रांची की होगी. यहां जिन योजनाओं का निर्माण दोबारा शुरू करना पड़ा या करने का आदेश मिला है, उनमें हज हाउस, बिरसा मुंडा स्मृति पार्क, करमटोली तालाब, एनएच-75 व एनएच-23 के किनारे बननेवाली नालियां, शहर की प्रमुख सड़कों के किनारे लगने वाली टाइल्स आदि शामिल हैं.
सरकारी राशि के इस दुरुपयोग पर जानकार लोग संबंधित विभाग के अधिकारियों को दोषी ठहराते हैं. वे कहते हैं कि एक ही बार में योजनाएं सटीक बननी चाहिए, ताकि बाद में इसमें तोड़-मरोड़ की संभावना न हो. योजनाएं पूरी तरह हितकारी व लाभकारी हों. लेकिन, झारखंड और विशेष कर राजधानी रांची में योजनाएं तैयार करने व उसे लागू करने में त्रुटियां रह जा रही हैं.
इसके अलावा मॉनिटरिंग व गुणवत्ता का अभाव है. यही वजह है कि निर्माण कार्य के बीच में ही योजनाअों में तब्दीली की जरूरत पड़ रही है.
मुख्यमंत्री भी दे चुके हैं हिदायत : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 13 जुलाई को नगर विकास विभाग के कार्यों को लेकर समीक्षा बैठक की थी. इसमें उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि राजधानी रांची का विकास पूरे देश में रोल माॅडल की तरह किया जाना चाहिए.
शहर के विकास के लिए आनेवाले 20-25 वर्ष की जरूरतों के अनुसार प्लानिंग करनी चाहिए. श्री दास ने कहा था कि पैसे की कमी नहीं है. जरूरत केवल सही प्लानिंग की है. पूरा रोड मैप तैयार किये बिना दिशाहीन कार्यवाही से कार्य में विलंब होता है.
एनएच-23 रांची-गुमला मार्ग पर पिस्का मोड़ से लेकर कटहल मोड़ के आगे तक जलापूर्ति के लिए मेन लाइन बिछा दी गयी थी. तब एनएच कार्यालय की अोर से एक पत्र जारी किया गया था कि बिना अनुमति के कुछ भी काम सड़क पर नहीं किया जाये, क्योंकि इस सड़क को चौड़ा करना था.
लेकिन, बिना अनुमति के काम हुआ और पाइप लाइन बिछा दी गयी. इस पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है. आज यह सड़क फोर लेन हो रही है. ऐसे में इस पाइप लाइन को हटाना पड़ रहा है, ताकि बाद में फिर से पाइप लाइन लगे.
करमटोली तालाब के सौंदर्यीकरण के दौरान पार्किंग व मैरेज हॉल का निर्माण कराया जा रहा था. एक आकलन के मुताबिक अभी तक इस पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर दिये गये थे.
मुख्यमंत्री ने इसका निरीक्षण किया और यह आदेश दिया है कि निर्माणाधीन हिस्से को हटाया जाये. इस पूरे जगह को ओपेन रखा जाये, ताकि इसका इस्तेमाल बेहतर हो. ऐसे में बने हुए हिस्से को तोड़ना होगा. यानी जितनी राशि अब तक योजना में खर्च हुई है, वह पूरी तरह से पानी में चली गयी.
सर्कुलर रोड स्थित ओल्ड जेल परिसर में बिरसा मुंडा स्मृति पार्क बनाया गया था. इस पार्क को आकर्षक रूप देने में करीब सात करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके थे.
लोग यहां घूमने के लिए आने भी लगे थे. बाद में सरकारी पेंच पर योजना रुक गयी. सरकारी पैसा फंस गया. अब आदेश हुआ है कि यहां पर शहीदों का पार्क बनाया जायेगा. 13 जुलाई को पार्क का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पार्क की स्थिति पर नाराजगी जतायी और नये सिरे पार्क के निर्माण का आदेश दिया है.
शहर में 10 तालाबों के सौंदर्यीकरण योजना पर काम चल रहा है. इस योजना के तहत सभी तालाबों के किनारे चहारदीवारी की गयी है. सभी तालाबों के चहारदीवारी में करीब एक करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. अब इसे तोड़ने का आदेश हुआ है, ताकि तालाब में पानी को आने का रास्ता मिले और लोग बाहर से इसकी सुंदरता देख सकें.
हज हाउस तोड़कर नये सिरे से बना रहे
कडरू में सबसे पहले करीब पांच करोड़ की लागत से हज हाउस का निर्माण कराया गया. लेकिन, भौतिक सत्यापन में इस भवन की गुणवत्ता खराब पायी गयी. इस कारण कारण वह क्षतिग्रस्त होने लगा. ऐसे में सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया कि हज हाउस को पूरी तरह से ध्वस्त कर उसकी जगह नया हज हाउस बनाया जाये. अब नये हज हाउस पर करीब 105 करोड़ की लागत से काम जारी है.
एनएच को चौड़ा करना था, नाली बना दी
एनएच-75 और एनएच-23 में सड़क के दोनों किनारे नाली का निर्माण कराया गया. तब यह सूचना आ रही थी कि दोनों सड़क फोर लेन की होगी, लेकिन नाली का काम जारी रहा. अब दोनों मार्ग पर फोर लेन का काम लगा हुआ है. जाहिर है कि अब इस नाली का अस्तित्व नहीं रहेगा. योजना में नये सिरे से नाली का निर्माण होगा. इसमें करीब तीन करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान लगाया गया है.
टाइल्स लगाया, नाली का अस्तित्व खत्म
सर्कुलर रोड में कई जगहों पर नाली थी. बारिश के दौरान सड़क का पानी आसानी से नाली में चला जाता था, लेकिन लाखों खर्च करके उसके ऊपर टाइल्स लगा दिया गया है. इस वजह से नाली का अस्तित्व खत्म हो गया है और अब बारिश का पानी सड़क पर जमा हो जाता है. टाइल्स योजना सहित कई अन्य योजनाअों को मिला कर सरकार के करीब तीन करोड़ रुपये डूबे हैं.
