रांची : वेतन को लेकर शुरू हुई थी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, चालक पर आकर अटकी

नेतागीरी कर रहा चालक उसे काम पर नहीं रखेंगे चालक को निकाला, तो करेंगे बेमियादी हड़ताल रांची : जून माह के बकाया वेतन के भुगतान, पीएफ और इएसआइ सुविधा की मांग को लेकर हो रही हड़ताल में मोरहाबादी और खेलगांव एमटीएस के कुल 250 सफाईकर्मी शामिल थे. एस्सेल इंफ्रा के अधिकारियों के साथ हुई वार्ता […]

नेतागीरी कर रहा चालक उसे काम पर नहीं रखेंगे
चालक को निकाला, तो करेंगे बेमियादी हड़ताल
रांची : जून माह के बकाया वेतन के भुगतान, पीएफ और इएसआइ सुविधा की मांग को लेकर हो रही हड़ताल में मोरहाबादी और खेलगांव एमटीएस के कुल 250 सफाईकर्मी शामिल थे. एस्सेल इंफ्रा के अधिकारियों के साथ हुई वार्ता के बाद खेलगांव एमटीएस के करीब आधे सफाईकर्मी सोमवार को काम पर लौट चुके थे. जबकि, शेष सफाईकर्मी हड़ताल के पांचवें दिन काम पर लौट गये. इसके बाद खेलगांव एमटीएस से जुड़े चार वार्डों में मंगलवार को सफाई व्यवस्था पटरी पर लौटती दिखी.
वहीं, मोरहाबादी एमटीएस के करीब 100 सफाईकर्मी अब भी हड़ताल पर जमे हुए हैं. इस वजह से इस एमटीएस से जुड़े छह वार्डों में अब भी कचरे का उठाव नहीं हो रहा है और न ही सड़कों पर झाड़ू लग रहा है. संबंधित इलाकों में डोर-टू-डोर कचरे का उठाव नहीं होने के कारण अब भी हालत नारकीय बनी हुई है.
इधर, नगर आयुक्त डॉ शांतनु अग्रहरि के आदेश पर मंगलवार को रांची नगर निगम के सहायक कार्यपालक पदाधिकारी रामकृष्ष्ण कुमार, सिटी मैनेजर सौरभ कुमार, संदीप कुमार और अंबुज सिंह इंफोर्समेंट अफसराें के साथ सफाईकर्मियों से वार्ता करने पहुंचे. पांच घंटे तक चली वार्ता के दौरान हड़ताल समाप्त करने के लिए अधिकारी मान-मनौव्वल करते रहे, लेकिन सफाईकर्मी टस से मस नहीं हुए. इनकी एक ही मांग थी कि जब तक कंपनी शमसुल को वापस काम पर नहीं रखती है, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे.
पांच घंटे बाद पहुंचीं हेल्थ अफसर की वार्ता, लेकिन नहीं बनी बात
हड़ताली सफाईकर्मियों से वार्ता के लिए रांची नगर निगम की हेल्थ अफसर डॉ किरण दोपहर 12 बजे मोरहाबादी स्थित एमटीएस पहुंचीं. हालांकि, उनके साथ भी वार्ता विफल रही. अंत में उन्होंने लालपुर थाना को सूचना दी.
लालपुर थानेदार दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे. यहां उन्होंने सफाईकर्मियों से कहा कि अगर वे हड़ताल नहीं खत्म करते हैं, तो सबको थाना ले जाया जायेगा. एक-दो को पुलिस ने पकड़ भी लिया. इससे नाराज महिला सफाईकर्मी पुलिस की जिप्सी के आगे ही बैठ गयीं. अंत में लालपुर थानेदार भी हड़ताली कर्मचारियों को समझाने में नाकाम रहे.
मुझे सफाईकर्मियों के हक की आवाज उठाने की सजा दी जा रही है. क्या समय पर वेतन मांगना और इपीएफ और इएसआइ का पैसा मांगना गलत है? हो सकता है कि आंदोलन के क्रम में किसी अधिकारी से बहस हुई होगी, लेकिन मैंने किसी भी अधिकारी के साथ कोई बदतमीजी नहीं की है. वाहन में आग लगाने की धमकी देने की बात मनगढ़ंत है.
शमसुल हक, हड़ताल का नेतृत्व करनेवाला चालक

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